
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में पवित्र नर्मदा नदी के शांत और मनोहारी तट पर स्थित हनुमान घाट मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। यह स्थान केवल एक मंदिर ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति, नर्मदा भक्ति और भगवान हनुमान की कृपा का अद्भुत संगम माना जाता है। सुबह की पहली किरण जब नर्मदा के जल पर पड़ती है और मंदिर परिसर में घंटियों की मधुर ध्वनि गूंजती है, तब यहां का वातावरण भक्तों को अलौकिक अनुभूति प्रदान करता है।
हनुमान घाट का धार्मिक महत्व नर्मदा नदी से भी जुड़ा हुआ है। प्रतिदिन अनेक श्रद्धालु यहां स्नान कर भगवान हनुमान के दर्शन करते हैं और नर्मदा माता की पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह घाट वर्षों से धार्मिक अनुष्ठानों, दीपदान, तर्पण और पूजा-पाठ का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। घाट की सीढ़ियों पर बैठकर बहती नर्मदा का शांत प्रवाह देखने का अनुभव किसी भी व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है।
स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच एक लोकप्रिय मान्यता यह भी है कि मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा का भाव दिन के अलग-अलग समय में भिन्न प्रतीत होता है—प्रातःकाल बाल स्वरूप, दोपहर में युवा स्वरूप और सायंकाल वृद्ध स्वरूप जैसा अनुभव होता है। यह लोकविश्वास मंदिर की विशेष पहचान बन चुका है।
धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। नर्मदा का शांत किनारा, हरियाली और मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को एक अलग ही अनुभूति प्रदान करता है। मंगलवार, शनिवार तथा हनुमान जयंती जैसे अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी अधिक रहती है।
हनुमान घाट मंदिर उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है जो भीड़भाड़ से दूर शांत वातावरण में भगवान हनुमान की आराधना करना चाहते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर मंडला के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और नर्मदा तट की आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
थान्वर बाँध, बीजेगाँव, नैनपुर – मंडला (Thanwar Dam, Bijegaon, Nainpur – Mandla)
स्थापना एवं इतिहास (Foundation and History)

हनुमान घाट मंदिर, मंडला का धार्मिक महत्व मुख्य रूप से इसकी नर्मदा तट पर स्थित पवित्र स्थिति के कारण है। उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों में मंदिर के निर्माण वर्ष, संस्थापक या किसी विशेष राजा द्वारा इसके निर्माण का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। इसलिए मंदिर की स्थापना के संबंध में किसी निश्चित वर्ष का उल्लेख करना उचित नहीं होगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान कई दशकों से नर्मदा तट के प्रमुख धार्मिक घाटों में शामिल रहा है। यहां भगवान हनुमान की पूजा के साथ-साथ नर्मदा माता का पूजन, स्नान, दीपदान, पितृ तर्पण तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से होते रहे हैं। समय के साथ यह घाट मंडला नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान की प्रतिमा दिन के तीन अलग-अलग समय में अलग-अलग स्वरूप का आभास कराती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि प्रातःकाल प्रतिमा बाल स्वरूप, दोपहर में युवा स्वरूप तथा संध्या समय वृद्ध स्वरूप जैसी प्रतीत होती है। यह धार्मिक आस्था इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक मानी जाती है और इसी कारण दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।
नर्मदा परिक्रमा करने वाले अनेक श्रद्धालु भी इस घाट पर रुककर भगवान हनुमान के दर्शन करते हैं। वर्षों से यहां साधु-संतों का आगमन, धार्मिक प्रवचन, रामायण पाठ और भजन-कीर्तन आयोजित होते रहे हैं। इस प्रकार यह स्थान केवल एक मंदिर न होकर आध्यात्मिक साधना और नर्मदा भक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
आज हनुमान घाट मंदिर मंडला के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि नर्मदा तट पर बैठकर ध्यान, जप और आध्यात्मिक शांति का भी अनुभव प्राप्त करते हैं।
मंदिर की वास्तुकला (Architecture)
हनुमान घाट मंदिर की वास्तुकला अत्यधिक भव्य या विशाल मंदिरों जैसी नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक भारतीय मंदिर शैली और नर्मदा घाट संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है। मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसका नर्मदा नदी के बिल्कुल समीप स्थित होना है। यहां से भक्तों को मंदिर और नर्मदा माता के दिव्य दर्शन एक साथ प्राप्त होते हैं।
मंदिर का गर्भगृह अपेक्षाकृत छोटा लेकिन अत्यंत शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण वाला है। गर्भगृह में स्थापित भगवान हनुमान की प्रतिमा भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर के सामने खुला प्रांगण है, जहां श्रद्धालु बैठकर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड तथा राम नाम का जप करते हैं।
मंदिर परिसर से नीचे उतरती घाट की चौड़ी सीढ़ियां सीधे नर्मदा नदी तक पहुंचती हैं। इन सीढ़ियों का धार्मिक महत्व विशेष है क्योंकि श्रद्धालु पहले नर्मदा स्नान करते हैं और उसके बाद भगवान हनुमान के दर्शन कर अपनी पूजा पूर्ण करते हैं।
निर्माण में स्थानीय पत्थरों तथा साधारण पारंपरिक शैली का उपयोग दिखाई देता है। मंदिर की सादगी ही इसकी सबसे बड़ी सुंदरता है। यहां आधुनिक सजावट की अपेक्षा धार्मिक वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य अधिक आकर्षित करता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मंदिर का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। नर्मदा के जल में मंदिर का प्रतिबिंब वातावरण को और भी दिव्य बना देता है। शांत वातावरण, बहती नर्मदा और मंदिर की घंटियों की ध्वनि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती है।
मंदिर की विशेषताएँ (Special Features)

हनुमान घाट मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका नर्मदा नदी के पवित्र तट पर स्थित होना है। यह स्थान धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु न केवल भगवान हनुमान के दर्शन करता है बल्कि नर्मदा माता के दर्शन एवं पूजन का भी सौभाग्य प्राप्त करता है।
मंदिर की सबसे प्रसिद्ध स्थानीय मान्यता भगवान हनुमान की प्रतिमा से जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि प्रतिमा सुबह, दोपहर और शाम तीन अलग-अलग आयु के स्वरूप का अनुभव कराती है। यही विशेषता इस मंदिर को मंडला के अन्य हनुमान मंदिरों से अलग पहचान प्रदान करती है।
मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। इन दिनों भक्त हनुमान चालीसा का पाठ, सिंदूर अर्पण, नारियल चढ़ाना तथा प्रसाद वितरण करते हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर भी यहां विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है।
नर्मदा स्नान के बाद भगवान हनुमान के दर्शन करने की परंपरा यहां विशेष महत्व रखती है। अनेक श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्रा की शुरुआत इसी क्रम से करते हैं। घाट पर दीपदान, ध्यान और जप करने वाले भक्तों की उपस्थिति पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है।
प्राकृतिक सुंदरता भी इस मंदिर की एक प्रमुख विशेषता है। सुबह और शाम के समय बहती नर्मदा, पक्षियों का मधुर कलरव, शीतल हवा और मंदिर की घंटियों की ध्वनि मिलकर ऐसा वातावरण बनाती हैं, जो मन को गहरी शांति प्रदान करता है। यही कारण है कि हनुमान घाट मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक सुकून का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मंदिर में विराजमान देवी-देवता (Deities Inside the Temple)
हनुमान घाट मंदिर में मुख्य रूप से भगवान हनुमान की पूजा की जाती है। कई भक्त हनुमान जी को रामभक्त के रूप में पूजते हैं और मंदिर में राम-सीता तथा लक्ष्मण के साथ हनुमान जी के स्वरूप के दर्शन भी होते हैं। यह मंदिर रामभक्ति और हनुमान भक्ति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
मंदिर परिसर में देखने योग्य स्थान (Places to See Inside the Temple)
भगवान हनुमान की मुख्य प्रतिमा – मंदिर का सबसे प्रमुख आकर्षण भगवान हनुमान की दिव्य प्रतिमा है। श्रद्धालु इसी प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना, दीप प्रज्वलन और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार दिन के अलग-अलग समय में प्रतिमा के भाव अलग प्रतीत होते हैं, जो इस मंदिर की विशेष पहचान है।
गर्भगृह – मंदिर का गर्भगृह अत्यंत शांत और आध्यात्मिक वातावरण से भरपूर है। यहां प्रवेश करते ही भक्तों को गहन श्रद्धा और मानसिक शांति का अनुभव होता है। गर्भगृह में नियमित रूप से पूजा, आरती और विशेष अवसरों पर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
मंदिर प्रांगण – मंदिर का खुला प्रांगण भक्तों के बैठकर भजन-कीर्तन, जप और ध्यान करने के लिए उपयुक्त स्थान है। यहां श्रद्धालु परिवार सहित बैठकर धार्मिक वातावरण का आनंद लेते हैं और कुछ समय आध्यात्मिक चिंतन में बिताते हैं।
हनुमान घाट की सीढ़ियां – मंदिर से जुड़ी घाट की चौड़ी सीढ़ियां सीधे नर्मदा नदी तक जाती हैं। यही स्थान स्नान, दीपदान, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र है। सुबह और शाम यहां का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है।
नर्मदा नदी का तट – मंदिर के ठीक सामने बहने वाली पवित्र नर्मदा नदी इस स्थान की सबसे बड़ी प्राकृतिक विशेषता है। यहां बैठकर बहते जल का शांत दृश्य देखने से मन को अद्भुत शांति प्राप्त होती है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का वातावरण विशेष रूप से आकर्षक हो जाता है।
सीता रपटन मंडला (Sita Raptan Mandla)
मंदिर में होने वाली आरतियाँ और भजन (Aartis and Bhajans)
मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम नियमित रूप से आरती की जाती है। सुबह की आरती के साथ पूजा-अर्चना होती है, जबकि शाम के समय हनुमान चालीसा, भजन और कीर्तन का आयोजन किया जाता है। मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड पाठ और विशेष भक्ति कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
मंदिर में होने वाले पर्व और कार्यक्रम (Festivals and Events)
हनुमान घाट मंदिर में पूरे वर्ष धार्मिक वातावरण बना रहता है, लेकिन कुछ विशेष पर्व ऐसे होते हैं जब यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इन अवसरों पर मंदिर परिसर और नर्मदा घाट दोनों भक्तों की आस्था, भक्ति और उत्साह से भर उठते हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ आसपास के गांवों और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
हनुमान जयंती मंदिर का सबसे प्रमुख धार्मिक उत्सव माना जाता है। इस दिन भगवान हनुमान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, विशेष आरती और प्रसाद वितरण का आयोजन होता है। श्रद्धालु भगवान को सिंदूर, चमेली का तेल, नारियल, लाल चोला और फूल अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं।
मंगलवार और शनिवार को भी मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन होता है। इन दोनों दिनों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो जाता है। दिनभर हनुमान चालीसा का पाठ, राम नाम संकीर्तन और भजन-कीर्तन चलते रहते हैं। कई भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर भंडारा एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी करते हैं।
राम नवमी, दीपावली, मकर संक्रांति, नर्मदा जयंती, कार्तिक पूर्णिमा तथा अन्य प्रमुख हिन्दू पर्वों पर भी श्रद्धालु पहले नर्मदा स्नान करते हैं और उसके बाद भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नर्मदा घाट पर दीपदान का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है।
नर्मदा परिक्रमा करने वाले साधु-संत और श्रद्धालु भी अपनी यात्रा के दौरान इस मंदिर में रुककर पूजा करते हैं। समय-समय पर धार्मिक प्रवचन, भजन संध्या, रामायण पाठ और अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे मंदिर का वातावरण सदैव भक्तिमय बना रहता है।
मंदिर का समय (Temple Timing)
सामान्य दिनों में मंदिर प्रातः लगभग पाँच बजे खुल जाता है और श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं। सायंकाल मंदिर लगभग आठ से नौ बजे तक खुला रहता है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर मंदिर के समय में परिवर्तन हो सकता है।
मंदिर के आसपास घूमने योग्य स्थान (Nearby Places)
नर्मदा घाट – हनुमान घाट मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण स्वयं पवित्र नर्मदा नदी का तट है। यहां बैठकर बहती हुई नर्मदा का शांत प्रवाह देखने का अनुभव अत्यंत सुखद होता है। सुबह और शाम के समय घाट का वातावरण विशेष रूप से मनमोहक रहता है। श्रद्धालु यहां स्नान, ध्यान और दीपदान भी करते हैं।
सहस्त्रधारा, मंडला – मंडला का यह प्रसिद्ध प्राकृतिक और धार्मिक स्थल नर्मदा नदी की अनेक छोटी-छोटी जलधाराओं के लिए जाना जाता है। बरसात और सर्दियों के मौसम में यहां का दृश्य अत्यंत आकर्षक होता है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह एक बेहतरीन स्थान है।
राजराजेश्वरी मंदिर – मंडला नगर का यह प्रमुख धार्मिक स्थल देवी मां को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच इसका विशेष महत्व है।
रामनगर किला – नर्मदा नदी के किनारे स्थित यह ऐतिहासिक किला गोंड शासनकाल की स्थापत्य कला और इतिहास की याद दिलाता है। यहां से नर्मदा नदी का सुंदर दृश्य दिखाई देता है और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आकर्षण है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान – यदि आपके पास पर्याप्त समय हो तो मंडला से कुछ दूरी पर स्थित विश्व प्रसिद्ध कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा भी की जा सकती है। यहां बाघ, बारहसिंगा, तेंदुआ, गौर, हिरण और अनेक पक्षियों की प्रजातियां देखने का अवसर मिलता है। यह मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।
मंदिर में ध्यान देने योग्य बातें (Important Things to Remember)
हनुमान घाट मंदिर की यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि उनकी यात्रा सुरक्षित, सुखद और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप रहे।
स्थानीय पुजारियों और मंदिर प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।
मंदिर में प्रवेश करने से पहले स्वच्छ एवं शालीन वस्त्र पहनें।
नर्मदा नदी में स्नान करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और तेज बहाव वाले क्षेत्र में जाने से बचें।
मंदिर परिसर और घाट पर स्वच्छता बनाए रखें तथा कचरा इधर-उधर न फैलाएं।
पूजा के दौरान अनुशासन बनाए रखें और अन्य श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करें।
फोटोग्राफी करने से पहले यदि आवश्यक हो तो स्थानीय अनुमति अवश्य लें।
बंदरों की उपस्थिति होने पर खाने-पीने की वस्तुएं खुले में न रखें।
बरसात के मौसम में घाट की सीढ़ियां फिसलन भरी हो सकती हैं, इसलिए सावधानीपूर्वक चलें।
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, विशेषकर नदी के किनारे।
प्लास्टिक का उपयोग कम करें और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें।
मोती महल, रामनगर मंडला (Moti Mahal, Ramnagar Mandla)
मंदिर का पूरा पता (Full Address)
हनुमान घाट मंदिर, नर्मदा नदी के तट के समीप, मंडला शहर, जिला मंडला, मध्य प्रदेश, भारत।
पूरा ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
यदि आप हनुमान घाट मंदिर की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अपनी यात्रा की शुरुआत सुबह के समय करना सबसे अच्छा रहेगा। सूर्योदय के समय नर्मदा नदी का दृश्य अत्यंत आकर्षक दिखाई देता है और मंदिर का वातावरण भी शांत रहता है। इस समय श्रद्धालु नर्मदा स्नान कर भगवान हनुमान के दर्शन करते हैं तथा प्रातःकालीन आरती में सम्मिलित होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव प्राप्त करते हैं।
सड़क मार्ग (By Road):
मंडला मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे जबलपुर, डिंडोरी, बालाघाट, सिवनी और नरसिंहपुर से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। जबलपुर से मंडला की दूरी लगभग 95 किलोमीटर है, जिसे निजी वाहन या नियमित बस सेवा के माध्यम से लगभग 2 से 3 घंटे में पूरा किया जा सकता है। मंडला बस स्टैंड पहुंचने के बाद हनुमान घाट मंदिर ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग (By Train):
मंडला का निकटतम रेलवे स्टेशन मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन है, जहां कुछ यात्री ट्रेनें उपलब्ध हैं। यदि आपको सीधी ट्रेन नहीं मिलती, तो जबलपुर जंक्शन सबसे सुविधाजनक रेलवे स्टेशन है। जबलपुर देश के प्रमुख शहरों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। वहां से बस, टैक्सी या निजी वाहन द्वारा आसानी से मंडला पहुंचा जा सकता है।
हवाई मार्ग (By Air):
हनुमान घाट मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर का डुमना एयरपोर्ट है, जो लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एयरपोर्ट से टैक्सी या बस द्वारा मंडला पहुंचना सुविधाजनक रहता है।
यात्रा का सबसे अच्छा समय:
अक्टूबर से मार्च तक का समय यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और नर्मदा तट का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है। बरसात के मौसम में भी घाट का दृश्य अत्यंत सुंदर दिखाई देता है, लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण सावधानी बरतना आवश्यक होता है।
यात्रा के दौरान उपलब्ध सुविधाएं:
मंदिर के आसपास पूजा सामग्री, फूल-माला, प्रसाद, चाय-नाश्ते की दुकानें तथा स्थानीय भोजन की सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। मंडला शहर में विभिन्न श्रेणी के होटल, लॉज और धर्मशालाएं भी मौजूद हैं, जहां श्रद्धालु अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार ठहर सकते हैं। यदि आप एक दिन में मंडला के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना चाहते हैं, तो हनुमान घाट मंदिर के साथ सहस्त्रधारा, रामनगर किला और अन्य प्रमुख स्थलों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
अजगर दादर मंडला (Ajgar Dadar, Mandla)
हनुमान घाट मंदिर, मंडला की तस्वीरें (Images of Hanuman Ghat Temple, Mandla)





निष्कर्ष (Conclusion)
हनुमान घाट मंदिर मंडला एक ऐसा पवित्र स्थल है जहाँ भक्ति, प्रकृति और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। नर्मदा मैया के तट पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता प्रदान करता है। मंडला यात्रा के दौरान इस पवित्र स्थल के दर्शन अवश्य करने चाहिए।
काला पहाड़, मंडला (Kala Pahad, Mandla)


