
बंदर चूहा एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जो मध्यप्रदेश के कटनी जिले के तहसील बहोरीबंद में स्थित है। यह पवित्र स्थान बहोरीबंद से लगभग 5 किलोमीटर दूर सिपली गांव में नदी के किनारे पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। यहां भगवान शंकर और हनुमान जी का मंदिर है। मंदिर तक पहुँचने के लिए पहले कच्ची सड़क से होकर जाना पड़ता है, फिर एक छोटे से पुल को पार करना पड़ता है। पुल पार करने के बाद एक मंजिला मंदिर में भगवान शंकर और हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित हैं।
बंदर चूहा मंदिर बहोरीबंद क्षेत्र, जिला कटनी (मध्य प्रदेश) में स्थित एक अत्यंत रहस्यमयी, शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर धार्मिक स्थल है। यह मंदिर नदी के किनारे स्थित होने के कारण न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक आकर्षक पर्यटन स्थल बन चुका है। यहां का वातावरण इतना शांत और मनमोहक है कि आने वाला हर यात्री कुछ समय के लिए अपनी सारी चिंताओं को भूलकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान काफी पुराना है और यहां से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। “बंदर चूहा” नाम अपने आप में एक रोचक रहस्य लिए हुए है, जो इस स्थान को और भी आकर्षक बनाता है। माना जाता है कि प्राचीन समय में यहां बंदरों और चूहों से जुड़ी कोई चमत्कारी घटना घटी थी, जिसके कारण इसका यह नाम पड़ा।
नदी के किनारे स्थित यह मंदिर प्राकृतिक हरियाली, बहती जलधारा और पक्षियों की मधुर आवाज़ों के बीच स्थित है। सुबह और शाम के समय यहां का दृश्य अत्यंत सुंदर हो जाता है। यह स्थान ध्यान, साधना और मानसिक शांति के लिए आदर्श माना जाता है। दूर-दूर से लोग यहां पूजा-अर्चना और घूमने के लिए आते हैं।
यह मंदिर किसी भव्य संरचना के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक ऊर्जा और स्थानीय आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यह जगह उन लोगों के लिए विशेष है जो भीड़भाड़ से दूर शांति और आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में रहते हैं।
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इतिहास (History)
बंदर चूहा मंदिर का इतिहास लिखित रूप में स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्थानीय जनश्रुतियों और परंपराओं के आधार पर इसे बहुत प्राचीन माना जाता है। कहा जाता है कि यह क्षेत्र कभी घने जंगलों और निर्जन नदी तटों से घिरा हुआ था, जहां साधु-संत तपस्या के लिए आते थे। प्राकृतिक वातावरण और शांत नदी तट इसे साधना के लिए उपयुक्त बनाते थे।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यहां एक ऐसी घटना का उल्लेख मिलता है जिसमें बंदरों और चूहों से जुड़ा कोई चमत्कार हुआ था, जिसने इस स्थान को विशेष पहचान दी। इसी घटना के आधार पर इसका नाम “बंदर चूहा” पड़ गया।
समय के साथ यहां छोटे-छोटे ग्रामीण श्रद्धालुओं ने पूजा स्थल विकसित किया, जो धीरे-धीरे एक मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया। पहले यह केवल एक प्राकृतिक स्थल था, लेकिन आस्था के बढ़ने के साथ यह धार्मिक स्थान बन गया।
मंदिर का कोई भव्य निर्माण इतिहास नहीं है, लेकिन इसकी आत्मिक और सांस्कृतिक विरासत इसे महत्वपूर्ण बनाती है। आज भी यह स्थान स्थानीय लोगों की आस्था और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
🐒 इस जगह का नाम बंदर चूहा क्यों पड़ा? (Why was this place named Monkey Rat?)

बहोरीबंद के इस स्थान को बंदर चूहा कहा जाता है, और इसके पीछे एक दिलचस्प कारण है। यहाँ बंदर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं और अपनी शरारतों के लिए प्रसिद्ध हैं। लोगों के अनुसार इन्हीं बंदरों की लगातार शरारतों के कारण इस जगह का नाम ‘बंदर चूहा’ पड़ा। आज भी जब आप यहाँ आते हैं, तो आपको बहुत से बंदर नजर आते हैं जो यहां का आकर्षण बढ़ा देते हैं।
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विशेषताएं (Features of the Temple)
बंदर चूहा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राकृतिक और शांत वातावरण है। यह मंदिर नदी किनारे स्थित होने के कारण पूरे वर्ष ठंडी और ताज़गी भरी हवा का अनुभव कराता है। यहां का वातावरण ध्यान और साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
मंदिर की संरचना साधारण है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा बहुत गहरी महसूस होती है। यहां कोई भव्य निर्माण नहीं है, बल्कि प्रकृति ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
नदी की कल-कल ध्वनि, पक्षियों की चहचहाहट और हरियाली से घिरा यह स्थान एक प्राकृतिक आश्रम जैसा प्रतीत होता है। यह स्थान फोटोग्राफी, पिकनिक और शांत समय बिताने के लिए भी उपयुक्त है।
मंदिर परिसर में देखने योग्य चीजें (Things to See Inside Temple Complex)
नदी किनारा दृश्य (Riverside Scenic View)
मंदिर के ठीक पास बहती नदी का दृश्य अत्यंत सुंदर है। यह स्थान सुबह और शाम के समय और भी आकर्षक हो जाता है।
मुख्य पूजा स्थल (Main Worship Area)
यहां स्थानीय लोग नियमित रूप से पूजा और आरती करते हैं। यह स्थान आस्था का मुख्य केंद्र है।
प्राकृतिक हरियाली क्षेत्र (Green Natural Surroundings)
मंदिर के चारों ओर फैली हरियाली इसे एक शांत और ताजगी भरा वातावरण प्रदान करती है।
ध्यान और शांति क्षेत्र (Meditation Spot)
यह स्थान ध्यान और योग के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
समय (Timing)
यह मंदिर आमतौर पर सुबह 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है। हालांकि यह एक खुला प्राकृतिक स्थल है, इसलिए समय में थोड़ी लचीलापन रहता है।
ध्यान देने योग्य बातें (Important Guidelines)
मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखें
नदी किनारे सावधानी रखें
शांत वातावरण का सम्मान करें
प्लास्टिक का उपयोग न करें
स्थानीय परंपराओं का पालन करें
प्राकृतिक वातावरण को नुकसान न पहुंचाएं
🚗 बंदर चूहा कैसे पहुँचे? (How did the monkey reach the rat?)

स्थान: सिपली गांव, बहोरीबंद, कटनी
कटनी से आप बस या टैक्सी द्वारा बहोरीबंद पहुंच सकते हैं। बहोरीबंद पहुँचने के बाद आप ऑटो या साझा ऑटो से सिपली गांव जा सकते हैं। यह स्थान बहोरीबंद से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है। यदि आपके पास निजी वाहन है, तो आप आसानी से वहां तक पहुंच सकते हैं।
📍 पता: M2P5+QF, पाकर, मध्यप्रदेश 483330
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यात्रा गाइड (Travel Guide)
बंदर चूहा मंदिर पहुंचने के लिए सबसे पहले कटनी शहर पहुंचना होता है। कटनी रेलवे स्टेशन इस क्षेत्र का मुख्य स्टेशन है जहां से देश के कई बड़े शहर जुड़े हुए हैं। स्टेशन से बहोरीबंद की दूरी लगभग 40-50 किलोमीटर है जिसे बस, ऑटो या टैक्सी से आसानी से तय किया जा सकता है।
सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कटनी से बहोरीबंद तक अच्छी सड़क सुविधा उपलब्ध है। स्थानीय बसें नियमित रूप से चलती हैं।
यात्रा का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है जब मौसम ठंडा और सुहावना रहता है। मानसून में नदी का दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है।
यह स्थान एक दिन की यात्रा के लिए आदर्श है, खासकर उन लोगों के लिए जो प्रकृति और शांति दोनों का अनुभव करना चाहते हैं।
🏞️ बंदर चूहा, बहोरीबंद, कटनी के आसपास घूमने योग्य स्थल: (Places to visit near Bandar Chuha, Bahoriband, Katni:)
आसपास देखने योग्य स्थान (Nearby Tourist Places)
बहोरीबंद क्षेत्र (Bahoriband Region)
यह क्षेत्र अपने प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
कटनी शहर (Katni City)
यह एक प्रमुख शहर है जहां बाजार, रेलवे और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
बरही नदी घाट (Barhi River Ghats)
यह घाट स्नान और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं।
कैमोर पहाड़ियां (Kymore Hills)
यह क्षेत्र प्राकृतिक ट्रेकिंग और पहाड़ी दृश्यों के लिए जाना जाता है।
विजयराघवगढ़ किला (Vijayraghavgarh Fort)
एक ऐतिहासिक किला जो बुंदेला काल की विरासत को दर्शाता है।
उमरियापान क्षेत्र (Umariapan Area)
यह एक शांत ग्रामीण क्षेत्र है जहां प्राकृतिक जीवन देखने को मिलता है।
अमरपुर जंगल क्षेत्र (Amarpur Forest Area)
यह घना वन क्षेत्र वन्य जीवन और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण है।
नर्मदा नदी क्षेत्र (Narmada River Region)
कुछ दूरी पर स्थित यह पवित्र नदी धार्मिक महत्व रखती है।
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