सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना”।
यह दोहा श्री हनुमान चालीसा से लिया गया है, और इसका गहरा भावार्थ है। इन पंक्तियों में न केवल श्री हनुमान जी की महिमा का वर्णन है, बल्कि उनके प्रति पूर्ण समर्पण से मिलने वाले लाभों का भी उल्लेख किया गया है।
ऐसी ही एक अत्यंत प्रभावशाली पंक्ति है:
“सब सुख लहै तुम्हारी सरना,
तुम रक्षक काहू को डरना।”
यह दोहा हमें यह विश्वास दिलाता है कि जब हम हनुमान जी की शरण में आ जाते हैं, तो सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और हमारा जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है।
जब स्वयं श्री हनुमान हमारी रक्षा कर रहे हों, तो फिर किसी भी प्रकार का भय या संकट टिक ही नहीं सकता।
मूल पंक्ति:
“सब सुख लहै तुम्हारी सरना,
तुम रक्षक काहू को डरना।”
भावार्थ:
जो भी व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान जी की शरण में आता है,
उसे जीवन के सभी सुख प्राप्त होते हैं।
क्योंकि जब हनुमान जी जैसे वीर और पराक्रमी देवता स्वयं रक्षा कर रहे हों,
तो फिर किसी भी प्रकार के भय, संकट, बाधा या शत्रु से डरने की कोई आवश्यकता नहीं रहती।
इसमें छिपा संदेश:
- यह पंक्ति विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।
- यह बताती है कि अगर हम श्रद्धा से प्रभु की शरण में जाएं,
तो हर भय मिट जाता है – चाहे वो शारीरिक हो, मानसिक हो, या आध्यात्मिक। - यह दोहा हनुमान जी की महाशक्ति और भक्तों के प्रति उनकी असीम करुणा को दर्शाता है।


