जब ब्रह्मांड ज़हर से भर उठा था, तब कोई था जिसने उसे पी लिया —
वो थे भगवान शिव, जिन्होंने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए कालकूट विष को अपने कंठ में धारण कर लिया।
तभी से वे कहलाए “नीलकंठ” — नीला गला वाले महादेव।
उनके इसी रूप का स्मरण करता है यह अद्भुत मंत्र:
मंत्र:
ॐ हं नीलकण्ठाय नमः
Om Ham Neelakanthaya Namah
मंत्र का अर्थ:
“मैं नीलकंठ भगवान शिव को नमन करता हूँ, जिन्होंने संसार की भलाई के लिए विष को धारण किया और हमें जीवन का अमृत दिया।”
इस मंत्र के अद्भुत लाभ:
🔹 नकारात्मक ऊर्जा का नाश:
मंत्र का उच्चारण आपके चारों ओर फैली नकारात्मकता को दूर करता है — जैसे नीलकंठ ने ज़हर को नियंत्रित किया, वैसे ही यह मंत्र आपके जीवन से विषैले विचार और डर को निकालता है।
🔹 मन की शांति और एकाग्रता:
जब जीवन में ऊहापोह और बेचैनी हो, तब यह मंत्र मन को स्थिरता देता है। ध्यान में इसका जाप मन को एकदम शांत करता है।
🔹 साहस और आंतरिक शक्ति:
यह मंत्र साधक को भीतर से इतना मजबूत बना देता है कि वह किसी भी चुनौती का सामना कर सके।
🔹 बीमारियों और कष्टों से राहत:
मान्यता है कि नियमित जप से मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तकलीफ़ें दूर होती हैं।
जप की विधि:
- सर्वोत्तम समय: सुबह या शाम का शांत समय, विशेषकर सोमवार को
- जाप की संख्या: प्रतिदिन कम से कम 108 बार
- जप के दौरान दिशा: उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
- श्रद्धा: सबसे आवश्यक – मन से जुड़ें, भाव से पुकारें


