बद्रीनाथ स्तुति भगवान विष्णु के बद्रीनाथ स्वरूप की स्तुति करने वाला एक पावन स्तोत्र है। बद्रीनाथ धाम, जो उत्तराखंड में स्थित है, भगवान विष्णु के पंच तीर्थों में से एक प्रमुख धाम है। भक्तगण बद्रीनाथ स्तुति का पाठ कर भगवान विष्णु से कृपा की प्रार्थना करते हैं।
बद्रीनाथ स्तुति का महत्व (Importance of Badrinath Stuti)
- यह स्तुति भगवान बद्रीनाथ की महिमा का गान करती है।
- भक्त इसे श्रद्धापूर्वक पढ़ने से मोक्ष और समृद्धि की प्राप्ति का विश्वास रखते हैं।
- इस स्तुति में भगवान विष्णु के करुणामय स्वरूप, उनकी दिव्य लीला और बद्रीनाथ धाम की महिमा का वर्णन होता है।
पवन मंद सुगंध शीतल,
हेम मंदिर शोभितम् ।
निकट गंगा बहत निर्मल,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
शेष सुमिरन करत निशदिन,
धरत ध्यान महेश्वरम् ।
वेद ब्रह्मा करत स्तुति,
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥
शक्ति गौरी गणेश शारद,
नारद मुनि उच्चारणम् ।
जोग ध्यान अपार लीला,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥
इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर,
धूप दीप प्रकाशितम् ।
सिद्ध मुनिजन करत जय जय,
बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥
यक्ष किन्नर करत कौतुक,
ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम् ।
श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥
कैलाश में एक देव निरंजन,
शैल शिखर महेश्वरम् ।
राजयुधिष्ठिर करत स्तुति,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥
श्री बद्रजी के पंच रत्न,
पढ्त पाप विनाशनम् ।
कोटि तीर्थ भवेत पुण्य,
प्राप्यते फलदायकम् ॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥
पवन मंद सुगंध शीतल,
हेम मंदिर शोभितम् ।
निकट गंगा बहत निर्मल,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥


