“घालीन लोटांगण” एक अत्यंत प्रसिद्ध मराठी भक्ति प्रार्थना है, जिसे विशेष रूप से भगवान की आरती के बाद गाया जाता है। यह प्रार्थना भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण, विनम्रता और श्रद्धा को व्यक्त करती है।
इस प्रार्थना में भक्त अपने तन, मन और वाणी को भगवान के चरणों में समर्पित करते हुए अपनी गहरी भक्ति और विनम्रता प्रकट करता है। यह केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि पूर्ण आत्मसमर्पण का भाव है, जो मन को शांति, सकारात्मकता और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास से भर देता है।
घालीन लोटांगण आरती (Ghalin Lotangan Aarti)
घालीन लोटांगण, वंदीन चरण ।
डोळ्यांनी पाहीन रुप तुझें ।
प्रेमें आलिंगन, आनंदे पूजिन ।
भावें ओवाळीन म्हणे नामा ।।१।।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव।
त्वमेव बंधुक्ष्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विध्या द्रविणं त्वमेव ।
त्वमेव सर्वं मम देवदेव।।२।।
कायेन वाचा मनसेंद्रीयेव्रा, बुद्धयात्मना वा प्रकृतिस्वभावात ।
करोमि यध्य्त सकलं परस्मे, नारायणायेति समर्पयामि ।।३।।
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं, जानकीनायकं रामचंद्र भजे ।।४।।
हरे राम हर राम, राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।


