अमोघ मनोकामना पूर्ति मंत्र वास्तव में Durga Saptashati के चौथे अध्याय शक्रादि स्तुति (Shakradi Stuti) से लिया गया एक प्रसिद्ध श्लोक है। यह स्तुति Durga माता से रक्षा, साहस और भय से मुक्ति की प्रार्थना के रूप में की जाती है।
यह मंत्र देवी से विनती करता है कि वे अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्रों के माध्यम से भक्तों की रक्षा करें और जीवन के सभी संकटों को दूर करें।
पूरा श्लोक (Complete Shloka)
ॐ शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥
श्लोक का अर्थ (Meaning)
इस श्लोक में भक्त देवी दुर्गा से चार प्रकार से रक्षा की प्रार्थना करता है।
1. शूलेन पाहि नो देवि
हे देवी! अपने शूल (त्रिशूल) से हमारी रक्षा करें।
2. पाहि खड्गेन चाम्बिके
हे अम्बिके! अपने खड्ग (तलवार) से भी हमारी रक्षा करें।
3. घण्टास्वनेन नः पाहि
अपनी घण्टा की ध्वनि से हमारी रक्षा करें।
4. चापज्यानिःस्वनेन च
और अपने धनुष की टंकार से भी हमारी रक्षा करें।
सरल शब्दों में यह प्रार्थना है कि माँ दुर्गा हर दिशा से अपने दिव्य बल से भक्तों को भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखें।
इस मंत्र का महत्व
यह मंत्र विशेष रूप से इन उद्देश्यों के लिए जपा जाता है:
- भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
- जीवन के संकटों से मुक्ति
- साहस और आत्मविश्वास प्राप्त करने के लिए
- मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना
- आध्यात्मिक सुरक्षा के लिए
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस श्लोक का जप करने से व्यक्ति को देवी की कृपा और सुरक्षा का अनुभव होता है।
मंत्र जप की पारंपरिक विधि
कुछ ग्रंथों में इसकी साधना की यह विधि बताई जाती है:
- पहले संकल्प लें कि किस उद्देश्य से मंत्र जप कर रहे हैं।
- लगभग एक लाख (100000) जप को पुरश्चरण माना जाता है।
- जप पूर्ण होने पर गाय के घी से दशांश हवन करना शुभ माना जाता है।
- साधना काल में सादा और सात्विक भोजन करना चाहिए।
- पूजा के लिए अलग पवित्र वस्त्र पहनना उचित माना गया है।


