
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित कुटुमसर गुफा भारत की सबसे रहस्यमयी और रोमांचक प्राकृतिक गुफाओं में से एक मानी जाती है। यह गुफा घने जंगलों से घिरे Kanger Valley National Park के भीतर स्थित है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की घने जंगलों, रहस्यमयी पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य से भरी धरती पर स्थित कुटुमसर गुफा भारत की सबसे अद्भुत प्राकृतिक गुफाओं में से एक मानी जाती है। यह गुफा कांगेर वैली नेशनल पार्क के भीतर स्थित है और अपनी अनोखी चूना-पत्थर संरचनाओं, गहरे अंधकार, प्राकृतिक सुरंगों और रहस्यमयी वातावरण के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है। जगदलपुर शहर से लगभग 38 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान रोमांच, प्रकृति और रहस्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
कुटुमसर गुफा का नाम सुनते ही लोगों के मन में किसी रहस्यमयी दुनिया की तस्वीर उभरने लगती है। जब पर्यटक गुफा के भीतर प्रवेश करते हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वे धरती के भीतर किसी अलग संसार में पहुंच गए हों। चारों ओर फैला अंधेरा, चट्टानों से टपकती पानी की बूंदें, गुफा के भीतर गूंजती आवाजें और पत्थरों की विचित्र आकृतियां इस स्थान को और भी रोमांचक बना देती हैं। यहां का वातावरण इतना शांत और रहस्यमयी होता है कि हर व्यक्ति कुछ देर के लिए प्रकृति के जादू में खो जाता है।
यह गुफा केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक और भूगर्भीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां मौजूद स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट संरचनाएं लाखों वर्षों में प्राकृतिक रूप से बनी हैं। गुफा के अंदर पाई जाने वाली दुर्लभ अंधी मछलियां यानी ब्लाइंड फिश भी इस स्थान की सबसे बड़ी खासियतों में से एक हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये मछलियां सदियों से अंधेरे वातावरण में रहने के कारण अपनी दृष्टि खो चुकी हैं।
कुटुमसर गुफा रोमांच प्रेमियों, फोटोग्राफरों, प्रकृति प्रेमियों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आने वाले पर्यटक केवल गुफा देखने नहीं बल्कि प्रकृति के उस अद्भुत रूप को महसूस करने आते हैं जिसे समय ने हजारों वर्षों में आकार दिया है। यही कारण है कि बस्तर की यात्रा करने वाले लगभग हर पर्यटक की सूची में कुटुमसर गुफा का नाम अवश्य शामिल रहता है।
वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, जगदलपुर (Sri Venkateshwara Swami Temple, Jagdalpur)
कुटुमसर गुफा का इतिहास (History of Kutumsar Cave)

कुटुमसर गुफा का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही रहस्यमयी और रोमांचक भी माना जाता है। यह गुफा लाखों वर्ष पुरानी प्राकृतिक संरचना मानी जाती है, जो चूना-पत्थर की परतों और पानी की धीमी प्राकृतिक प्रक्रिया से बनी है। स्थानीय आदिवासी समुदाय इस गुफा के बारे में सदियों से जानते थे और इसे एक रहस्यमयी तथा पवित्र स्थान मानते थे। पुराने समय में यह गुफा घने जंगलों के बीच पूरी तरह छिपी हुई थी, इसलिए बाहरी दुनिया के लोगों को इसके बारे में बहुत कम जानकारी थी।
कुटुमसर गुफा के बारे में स्थानीय आदिवासी समुदाय को बहुत पहले से जानकारी थी, लेकिन इसका वैज्ञानिक अध्ययन वर्ष 1951 में प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता डॉ. शंकर तिवारी (Shankar Tiwari) द्वारा किया गया। उनके शोध और अध्ययन के बाद यह गुफा राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुई और लोगों को इसकी वास्तविक ऐतिहासिक तथा भूगर्भीय महत्ता के बारे में जानकारी मिली। डॉ. शंकर तिवारी ने गुफा के भीतर मौजूद प्राकृतिक संरचनाओं, जलकुंडों और दुर्लभ जीवों का अध्ययन कर इसे भारत की महत्वपूर्ण प्राकृतिक गुफाओं में शामिल किया।
यह गुफा मुख्य रूप से चूना पत्थर (Limestone) से बनी हुई है और माना जाता है कि लाखों वर्षों तक पानी की बूंदों के लगातार गिरने से इसके अंदर अलग-अलग आकार की प्राकृतिक संरचनाएं बनती गईं। गुफा के भीतर बनने वाली स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट आकृतियां आज भी पर्यटकों और वैज्ञानिकों को आकर्षित करती हैं। कुछ आकृतियां मंदिरों के स्तंभ, शिवलिंग और प्राकृतिक मूर्तियों जैसी दिखाई देती हैं, जिससे यह स्थान और भी रहस्यमयी लगता है।
कुटुमसर गुफा लगभग 200 से 330 मीटर तक फैली हुई मानी जाती है और इसके भीतर कई प्राकृतिक सुरंगें, छोटे कक्ष और संकरे रास्ते मौजूद हैं। गुफा के अंदर गहरा अंधकार और नमी भरा वातावरण इसे रोमांच से भर देता है। यहां पाए जाने वाले दुर्लभ जीव, विशेषकर अंधी मछलियां यानी ब्लाइंड फिश, इस गुफा को वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण बनाती हैं।
ऐसा कहा जाता है कि पहले इस गुफा को “गोपनसर गुफा” कहा जाता था, जिसका अर्थ होता है – छिपी हुई गुफा। बाद में आसपास बसे “कुटुमसर” गांव के कारण इसका नाम कुटुमसर गुफा पड़ गया। धीरे-धीरे यह स्थान स्थानीय लोगों के बीच धार्मिक और रहस्यमयी महत्व का केंद्र बन गया। कई ग्रामीणों का मानना था कि गुफा के भीतर देवी-देवताओं का निवास है और यहां प्राकृतिक रूप से बनी कुछ आकृतियों को वे दिव्य प्रतीक मानते थे।
आज कुटुमसर गुफा बस्तर पर्यटन की पहचान बन चुकी है। यह स्थान छत्तीसगढ़ सरकार और वन विभाग द्वारा संरक्षित है ताकि इसकी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और ऐतिहासिक महत्व सुरक्षित रह सके। हर साल हजारों पर्यटक यहां आकर इस अद्भुत प्राकृतिक धरोहर का अनुभव करते हैं।
कुटुमसर गुफा की विशेषताएँ (Features of Kutumsar Cave)
कुटुमसर गुफा अपनी प्राकृतिक बनावट, रहस्यमयी वातावरण और अनोखी जैव विविधता के कारण पूरे भारत में विशेष पहचान रखती है। यह गुफा धरती के भीतर बनी ऐसी प्राकृतिक संरचना है, जहां पहुंचते ही इंसान खुद को एक अलग दुनिया में महसूस करता है। गुफा के अंदर गहरा अंधकार, ठंडी नमी भरी हवा और पानी की बूंदों की गूंज एक ऐसा वातावरण तैयार करती है जो रोमांच और रहस्य से भरपूर होता है।
इस गुफा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट संरचनाएं हैं। छत से नीचे लटकती और जमीन से ऊपर उठती ये पत्थर की आकृतियां हजारों वर्षों तक पानी की बूंदों के लगातार गिरने से बनी हैं। कई संरचनाएं ऐसी दिखाई देती हैं जो प्राकृतिक शिवलिंग, स्तंभ, झूमर या किसी विशाल मूर्ति जैसी प्रतीत होती हैं। जब गाइड टॉर्च की रोशनी इन आकृतियों पर डालते हैं तो उनका दृश्य अत्यंत आकर्षक लगता है।
कुटुमसर गुफा की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता यहां पाई जाने वाली दुर्लभ “ब्लाइंड फिश” हैं। ये मछलियां पूरी तरह अंधी होती हैं और केवल गुफा के अंधेरे जलकुंडों में ही जीवित रहती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार लंबे समय तक अंधेरे वातावरण में रहने के कारण इनकी आंखें विकसित नहीं हो पाईं। यह दुर्लभ प्रजाति शोधकर्ताओं और जीव वैज्ञानिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
गुफा के भीतर कई संकरे रास्ते और प्राकृतिक सुरंगें हैं, जिनसे गुजरते समय रोमांच का अनुभव कई गुना बढ़ जाता है। कुछ स्थान इतने संकरे हैं कि वहां झुककर चलना पड़ता है। गुफा के अंदर तापमान बाहर की तुलना में काफी ठंडा रहता है, जिससे यहां का वातावरण हमेशा रहस्यमयी बना रहता है।
यह गुफा ध्वनि गूंजने की अपनी प्राकृतिक क्षमता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां छोटी सी आवाज भी कई बार गूंजती हुई सुनाई देती है। इसके अलावा चमगादड़ों की आवाजें और पानी टपकने की ध्वनि गुफा के रोमांच को और बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि कुटुमसर गुफा को बस्तर का सबसे रोमांचकारी पर्यटन स्थल माना जाता है।
बस्तर महल, जगदलपुर छत्तीसगढ़ (Bastar Palace, Jagdalpur Chhattisgarh)
गुफा के अंदर देखने लायक चीजें (Things to See Inside the Cave)

प्राकृतिक शिवलिंग जैसी संरचनाएं (Natural Shivling Formations)
गुफा के भीतर कई ऐसी चट्टानी आकृतियां दिखाई देती हैं जो बिल्कुल शिवलिंग जैसी प्रतीत होती हैं। स्थानीय लोग इन्हें धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं। पानी की बूंदों द्वारा हजारों वर्षों में बनी ये संरचनाएं देखने में अत्यंत आकर्षक लगती हैं। टॉर्च की रोशनी पड़ने पर इनका दृश्य और भी अद्भुत दिखाई देता है।
स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट संरचनाएं (Stalactite and Stalagmite Formations)
गुफा की छत से नीचे लटकती और जमीन से ऊपर उठती पत्थर की संरचनाएं यहां का मुख्य आकर्षण हैं। इन आकृतियों को देखकर ऐसा लगता है मानो किसी कलाकार ने पत्थरों को तराशकर मूर्तियां बनाई हों।
ब्लाइंड फिश वाले जलकुंड (Blind Fish Water Pools)
गुफा के भीतर छोटे-छोटे प्राकृतिक जलकुंड बने हुए हैं जहां दुर्लभ अंधी मछलियां पाई जाती हैं। ये मछलियां बिना आंखों के भी आसानी से पानी में तैरती रहती हैं। पर्यटक इन्हें देखकर बेहद आश्चर्यचकित हो जाते हैं।
रहस्यमयी संकरी सुरंगें (Mysterious Narrow Passages)
गुफा के अंदर कई संकरे रास्ते और सुरंगें हैं जिनसे गुजरते समय रोमांच का अलग ही अनुभव होता है। कुछ जगहों पर झुककर और सावधानी से चलना पड़ता है।
प्राकृतिक पत्थर के स्तंभ (Natural Stone Pillars)
कुछ स्थानों पर चट्टानों की आकृतियां मंदिरों के विशाल स्तंभों जैसी दिखाई देती हैं। ये प्राकृतिक संरचनाएं गुफा की सुंदरता को और भी बढ़ा देती हैं।
गूंजती हुई प्राकृतिक ध्वनियां (Echoing Natural Sounds)
गुफा के भीतर पानी की बूंदों की आवाज और गूंजती ध्वनियां बेहद रहस्यमयी वातावरण तैयार करती हैं। यहां की शांति और ध्वनि प्रभाव पर्यटकों को रोमांचित कर देते हैं।
चमगादड़ों के समूह (Groups of Bats)
गुफा के ऊपरी हिस्सों में चमगादड़ों के झुंड दिखाई देते हैं। उनकी आवाजें और गतिविधियां गुफा के वातावरण को और भी रहस्यमयी बना देती हैं।
प्राकृतिक जलधाराएं (Natural Water Streams)
कुछ स्थानों पर पत्थरों के बीच से लगातार पानी रिसता रहता है। यह दृश्य गुफा की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देता है।
कुटुमसर गुफा की टाइमिंग (Timing of Kutumsar Cave)
- सुबह: 8:00 बजे
- शाम: 4:00 बजे तक प्रवेश
मानसून के मौसम में आमतौर पर यह गुफा बंद रहती है क्योंकि बारिश के दौरान इसमें पानी भर जाता है।
तीरथगढ़ जलप्रपात, जगदलपुर (Tirathgarh Waterfall, Jagdalpur)
आसपास घूमने लायक स्थान (Nearby Tourist Places)
तीरथगढ़ जलप्रपात (Tirathgarh Waterfall)
कुटुमसर गुफा से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात बस्तर के सबसे खूबसूरत और प्रसिद्ध झरनों में गिना जाता है। यह जलप्रपात कांगेर नदी पर बना हुआ है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि पानी कई स्तरों और सीढ़ीनुमा चट्टानों से नीचे गिरता है, जिससे इसका दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। लगभग 300 फीट की ऊंचाई से गिरता सफेद पानी दूर से ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मानसून और सर्दियों के मौसम में यहां की प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर होती है।
झरने के आसपास घने जंगल और शांत वातावरण इसे पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहतरीन स्थान बनाते हैं। यहां फोटोग्राफी के लिए कई शानदार पॉइंट मौजूद हैं जहां पर्यटक यादगार तस्वीरें ले सकते हैं। सुबह और शाम के समय यहां का वातावरण बेहद मनमोहक हो जाता है। झरने तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं, जिनसे नीचे उतरकर पर्यटक करीब से झरने की खूबसूरती देख सकते हैं।
कैलाश गुफा (Kailash Cave)
कैलाश गुफा कांगेर वैली नेशनल पार्क के भीतर स्थित एक और अद्भुत प्राकृतिक गुफा है, जो अपनी सफेद चूना-पत्थर संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है। यह गुफा कुटुमसर गुफा से कुछ दूरी पर स्थित है और एडवेंचर पसंद पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय मानी जाती है। गुफा के भीतर प्रवेश करते ही ठंडी हवा और चमकदार पत्थर की आकृतियां एक अलग ही अनुभव कराती हैं।
यहां की प्राकृतिक संरचनाएं इतनी सुंदर दिखाई देती हैं कि कई लोगों को यह किसी बर्फ से बनी गुफा जैसी लगती है। गुफा के भीतर कई जगहों पर पत्थरों की आकृतियां शिवलिंग और मंदिर जैसी प्रतीत होती हैं, जिसके कारण स्थानीय लोग इसे धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानते हैं। कैलाश गुफा का वातावरण बेहद शांत और रहस्यमयी होता है, जो रोमांच और प्रकृति का अद्भुत अनुभव देता है।
चित्रकोट जलप्रपात (Chitrakote Waterfall)
चित्रकोट जलप्रपात बस्तर का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माना जाता है और इसे “भारत का नियाग्रा फॉल” भी कहा जाता है। इंद्रावती नदी पर बना यह विशाल झरना लगभग 90 फीट की ऊंचाई से गिरता है और मानसून के दौरान इसका दृश्य अत्यंत भव्य दिखाई देता है। जब नदी में पानी अधिक होता है तब यह झरना घोड़े की नाल जैसी विशाल आकृति बना लेता है, जो देखने में बेहद अद्भुत लगता है।
यहां शाम के समय सूर्यास्त का दृश्य बेहद आकर्षक होता है। पर्यटक यहां बोटिंग का आनंद भी ले सकते हैं। झरने के आसपास कई छोटे व्यू पॉइंट और बैठने की जगहें बनाई गई हैं, जहां से लोग आराम से प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। बारिश के मौसम में यहां पानी की तेज गर्जना और चारों ओर उड़ती पानी की बूंदें रोमांच को कई गुना बढ़ा देती हैं।
कांगेर धारा (Kanger Dhara)
कांगेर धारा एक शांत और प्राकृतिक जलधारा है जो घने जंगलों और हरियाली के बीच स्थित है। यह स्थान उन लोगों के लिए बेहद खास है जो भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ शांत समय बिताना चाहते हैं। यहां बहता साफ पानी, पेड़ों की हरियाली और पक्षियों की आवाजें वातावरण को बेहद सुकूनभरा बना देती हैं।
यह स्थान पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए भी काफी लोकप्रिय है। मानसून के दौरान यहां की हरियाली और भी खूबसूरत हो जाती है। कई पर्यटक यहां बैठकर घंटों प्रकृति का आनंद लेते हैं। कांगेर धारा का वातावरण इतना शांत होता है कि यहां पहुंचकर मन पूरी तरह तरोताजा महसूस करता है।
दंडक गुफा (Dandak Cave)
दंडक गुफा रोमांच और रहस्य पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए एक शानदार स्थान मानी जाती है। यह गुफा अपने प्राकृतिक रास्तों, अंधेरे कक्षों और पत्थर की अनोखी आकृतियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां का वातावरण काफी रहस्यमयी होता है और गुफा के भीतर गूंजती आवाजें रोमांच को और बढ़ा देती हैं।
गुफा के अंदर कई संकरी सुरंगें और छोटे-छोटे कक्ष मौजूद हैं, जिनसे गुजरते समय एडवेंचर का वास्तविक अनुभव होता है। यह स्थान उन लोगों के लिए बेहद खास है जो प्राकृतिक गुफाओं और जंगलों की खोज करना पसंद करते हैं।
मानव विज्ञान संग्रहालय, जगदलपुर (Anthropological Museum Jagdalpur)
यदि आप बस्तर की आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानना चाहते हैं, तो मानव विज्ञान संग्रहालय जरूर घूमना चाहिए। यहां बस्तर की विभिन्न जनजातियों से जुड़ी पारंपरिक वस्तुएं, हथियार, कपड़े, आभूषण और दैनिक उपयोग की चीजें प्रदर्शित की गई हैं।
यह संग्रहालय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को समझने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। यहां घूमने के बाद पर्यटकों को आदिवासी जीवनशैली और उनकी परंपराओं के बारे में काफी रोचक जानकारी मिलती है। इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह बेहद खास मानी जाती है।
बस्तर पैलेस (Bastar Palace)
बस्तर पैलेस जगदलपुर शहर में स्थित एक ऐतिहासिक महल है, जो बस्तर राजपरिवार की शाही विरासत को दर्शाता है। इस महल की वास्तुकला बेहद आकर्षक है और इसकी पुरानी बनावट लोगों को इतिहास के पुराने दौर की याद दिलाती है।
महल के आसपास का शांत वातावरण और सुंदर परिसर पर्यटकों को काफी पसंद आता है। यहां आकर लोग बस्तर के राजाओं और उनके इतिहास के बारे में जान सकते हैं। फोटोग्राफी के लिए भी यह स्थान काफी लोकप्रिय माना जाता है।
दलपत सागर झील (Dalpat Sagar Lake)
दलपत सागर जगदलपुर की सबसे प्रसिद्ध और पुरानी झीलों में से एक है। यह झील शहर के बीचोंबीच स्थित है और शाम के समय यहां का दृश्य बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। झील के किनारे बैठकर सूर्यास्त देखना पर्यटकों को काफी पसंद आता है।
यहां बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध रहती है, जिससे पर्यटक झील के बीच जाकर आसपास के सुंदर दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। रात के समय झील के आसपास की रोशनी इसका आकर्षण और बढ़ा देती है। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए यह जगह बेहद शानदार मानी जाती है।
यहां ध्यान देने योग्य बातें (Important Things to Keep in Mind)
कुटुमसर गुफा घूमते समय कुछ सावधानियां रखना बेहद जरूरी है। गुफा के भीतर काफी अंधेरा और फिसलन होती है, इसलिए मजबूत और आरामदायक जूते पहनना चाहिए। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
गुफा के अंदर बिना गाइड के जाना सुरक्षित नहीं माना जाता। कई जगह रास्ते संकरे और गहरे हैं, इसलिए हमेशा गाइड के निर्देशों का पालन करें। गुफा के भीतर तेज आवाज करने या पत्थरों को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।
प्लास्टिक और कचरा बिल्कुल न फैलाएं क्योंकि यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। मानसून के समय यहां जाने से पहले जानकारी जरूर लें क्योंकि उस दौरान गुफा बंद हो सकती है। कैमरा ले जाने पर अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।
कुटुमसर गुफा का पूरा पता (Full Address)
कुटुमसर गुफा
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
जगदलपुर, जिला बस्तर
छत्तीसगढ़ – 494001
भारत
कुटुमसर गुफा ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
कैसे पहुंचे (How to Reach)
हवाई मार्ग से (By Air)
सबसे नजदीकी एयरपोर्ट Swami Vivekananda Airport है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा जगदलपुर पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग से (By Train)
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन Jagdalpur Railway Station है।
सड़क मार्ग से (By Road)
जगदलपुर से कुटुमसर गुफा की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। यहां टैक्सी, बाइक या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
कुटुमसर गुफा, बस्तर, जगदलपुर की छवियाँ (Images of Kutumsar Cave, Bastar, Jagdalpur)



यात्रा का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
नवंबर से फरवरी का समय यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और गुफा खुली रहती है।
यात्रा का अनुभव (Travel Experience)
कुटुमसर गुफा की यात्रा किसी रोमांचक एडवेंचर से कम नहीं होती। जैसे-जैसे आप गुफा के अंदर उतरते हैं, अंधेरा और रहस्यमयी वातावरण आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। टॉर्च की हल्की रोशनी में चमकती चूना-पत्थर की आकृतियाँ इस जगह की सुंदरता को और भी बढ़ा देती हैं।


