
मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में स्थित श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और स्थानीय परंपराओं के अनुसार इसका संबंध त्रेता युग से माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम ने यहाँ भगवान शिव की आराधना की थी, इसी कारण इस स्थान का नाम “रामकुल्लेश्वर” पड़ा।
श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर केवल एक शिव मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम है। नर्मदा अंचल की पावन भूमि पर स्थित यह प्राचीन धाम सदियों से श्रद्धालुओं की भक्ति का केंद्र बना हुआ है। मंदिर का नाम सुनते ही भगवान श्रीराम और भगवान शिव के दिव्य संबंध की स्मृति जीवंत हो उठती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का संबंध सीधे त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
कहा जाता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी इस क्षेत्र में पधारे थे। उस समय उन्होंने यहां विश्राम किया और आसपास के प्राकृतिक वातावरण से प्रभावित होकर भगवान शिव की आराधना की। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने स्वयं इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर पूजा-अर्चना की थी। इसी कारण यह धाम “श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आज भी हजारों श्रद्धालु इस स्थान को भगवान श्रीराम और भगवान शिव के दिव्य मिलन स्थल के रूप में श्रद्धापूर्वक देखते हैं।
मंदिर परिसर का वातावरण अत्यंत शांत, आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। विशाल वृक्षों की छाया, पक्षियों की मधुर ध्वनि और मंदिर के आसपास फैली हरियाली यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को मानसिक शांति प्रदान करती है। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन अमर बावड़ी, नागदेव मंदिर और स्वयंभू श्रीगणेश मंदिर इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं।
श्रावण मास, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और महाआरती का आयोजन किया जाता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। बड़वानी की धार्मिक पहचान में श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर का विशेष स्थान है और यह मंदिर आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं तथा दिव्य मान्यताओं के कारण श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
भंवरगढ़ का किला बड़वानी (Bhanwargarh Fort, Barwani)
स्थापना और पौराणिक कथा (Establishment and Mythological Significance)

श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वह पौराणिक मान्यता है, जो इसे सीधे त्रेतायुग और भगवान श्रीराम के वनवास काल से जोड़ती है। स्थानीय परंपराओं और जनश्रुतियों के अनुसार जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी वनवास के दौरान विभिन्न वन क्षेत्रों से होकर गुजर रहे थे, तब वे वर्तमान बड़वानी क्षेत्र में भी पहुंचे थे। उस समय यह स्थान घने जंगलों, प्राकृतिक जल स्रोतों और शांत वातावरण से घिरा हुआ था।
कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने इस स्थान की पवित्रता को अनुभव किया और यहां कुछ समय विश्राम किया। विश्राम के दौरान उन्हें एक प्राकृतिक जल स्रोत प्राप्त हुआ, जिसका जल अत्यंत निर्मल और शीतल था। इसी जल से उन्होंने भगवान शिव का अभिषेक किया और गहन श्रद्धा के साथ उनकी आराधना की। मान्यता है कि भगवान श्रीराम की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इस स्थान को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा से संपन्न किया। तभी से यह स्थान श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
मंदिर परिसर में स्थित अमर बावड़ी को भी इसी कथा से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जिस जल से भगवान श्रीराम ने शिवलिंग का अभिषेक किया था, वही जल आज भी इस बावड़ी के रूप में विद्यमान है। इस कारण यहां का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है।
हालांकि इस कथा का ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन सदियों से स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता जीवित है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु केवल भगवान शिव के दर्शन ही नहीं करते, बल्कि भगवान श्रीराम की स्मृतियों से जुड़े इस पवित्र स्थल का भी अनुभव करते हैं। मंदिर की स्थापना से जुड़ी यह कथा इसे बड़वानी के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक बनाती है।
इतिहास (History of Shri Ramkulleshwar Mahadev Temple)
श्रीरामकुल्लेश्वर Mahadev मंदिर का इतिहास स्थानीय धार्मिक परंपराओं, लोकविश्वासों और पीढ़ियों से चली आ रही कथाओं में समाहित है। यद्यपि मंदिर के निर्माण की सटीक तिथि और संस्थापक के संबंध में कोई प्रमाणिक अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी यह माना जाता है कि यह स्थल अत्यंत प्राचीन है और लंबे समय से बड़वानी क्षेत्र की धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है।
पुराने समय में यह क्षेत्र घने जंगलों और प्राकृतिक जल स्रोतों से घिरा हुआ था। यहां स्थित अमर बावड़ी और प्राचीन वृक्ष इस बात का संकेत देते हैं कि यह स्थान लंबे समय से मानव गतिविधियों और धार्मिक साधना का केंद्र रहा होगा। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार मंदिर परिसर में कई वर्षों से नियमित पूजा-अर्चना होती आ रही है और अनेक संत-महात्माओं ने यहां तपस्या भी की थी।
समय के साथ मंदिर का स्वरूप विकसित होता गया। श्रद्धालुओं और स्थानीय समाज के सहयोग से मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार किया गया तथा पूजा-अर्चना की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया गया। वर्तमान में मंदिर परिसर सुव्यवस्थित रूप में विकसित हो चुका है, लेकिन इसके मूल धार्मिक स्वरूप और पौराणिक महत्व को यथावत बनाए रखा गया है।
श्रावण मास में निकलने वाला श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव का शाही डोला इस मंदिर की ऐतिहासिक धार्मिक परंपराओं का प्रमुख हिस्सा है। यह आयोजन वर्षों से नगर की धार्मिक संस्कृति का अभिन्न अंग बना हुआ है। डोला यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु भगवान शिव और भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ नगर भ्रमण करते हैं।
आज यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि बड़वानी की धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है।
वास्तुकला (Architecture)

श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर की वास्तुकला भव्यता से अधिक आध्यात्मिक सरलता और प्राकृतिक वातावरण पर आधारित दिखाई देती है। मंदिर परिसर को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इसका निर्माण श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर किया गया है।
मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही खुला प्रांगण दिखाई देता है, जहां श्रद्धालु एकत्र होकर पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं। मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया गया है, जिससे परिसर व्यवस्थित और आकर्षक दिखाई देता है। मंदिर भवन अपेक्षाकृत सरल संरचना वाला है, लेकिन इसकी पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष अनुभव प्रदान करता है।
परिसर में स्थित प्राचीन वृक्ष मंदिर की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं। इन वृक्षों की छाया पूरे परिसर को शीतल और शांत बनाए रखती है। मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे सामान्य मंदिरों से अलग पहचान देता है।
मंदिर परिसर में शिवलिंग के अतिरिक्त नागदेव मंदिर, स्वयंभू गणेश मंदिर और अमर बावड़ी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी स्थित हैं। इन सभी संरचनाओं का विन्यास इस प्रकार किया गया है कि श्रद्धालु एक ही परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन कर सकें।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों, ध्वजों, रंग-बिरंगी सजावट और प्रकाश व्यवस्था से सजाया जाता है। तब इसकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। वास्तुकला की दृष्टि से यह मंदिर भले ही विशाल न हो, लेकिन इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा और प्राकृतिक वातावरण इसे अत्यंत विशेष बनाते हैं।
श्री बड़ी बिजासन माता मंदिर, सेंधवा (Shri Badi Bijasan Mata Mandir, Sendhwa)
मंदिर का आंगन विशाल है जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन-कीर्तन करते हैं।
मंदिर की विशेषताएं (Unique Features of the Temple)
श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर की अनेक ऐसी विशेषताएं हैं, जो इसे बड़वानी के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान प्रदान करती हैं।
सबसे बड़ी विशेषता इसका भगवान श्रीराम से जुड़ा होना है। भारत में भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं, लेकिन ऐसे मंदिर बहुत कम हैं जिनकी स्थापना की मान्यता स्वयं भगवान श्रीराम से जुड़ी हो। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
दूसरी प्रमुख विशेषता मंदिर परिसर में स्थित अमर बावड़ी है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस बावड़ी का जल कभी समाप्त नहीं होता। स्थानीय लोगों के अनुसार अतीत में कई बार क्षेत्र में जल संकट उत्पन्न हुआ, लेकिन बावड़ी का जल लोगों की आवश्यकता पूरी करता रहा।
तीसरी विशेषता नागदेव की उपस्थिति से जुड़ी मान्यता है। अनेक श्रद्धालु और स्थानीय निवासी बताते हैं कि मंदिर परिसर में समय-समय पर नाग दिखाई देते हैं। लोग इसे मंदिर के रक्षक नागदेव की उपस्थिति मानते हैं।
चौथी विशेषता स्वयंभू श्रीगणेश मंदिर है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है। इसी कारण गणेश चतुर्थी और अन्य अवसरों पर यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है।
इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर की प्राकृतिक हरियाली, वन औषधियों की उपस्थिति और शांत वातावरण इसे आध्यात्मिक साधना के लिए भी उपयुक्त बनाते हैं। यही सभी विशेषताएं मिलकर श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर को एक अनूठा धार्मिक स्थल बनाती हैं।
मंदिर के अंदर विराजमान देवी-देवता (Deities Inside the Temple)
मंदिर में मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा होती है। इसके अलावा परिसर में अन्य देव प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं, जैसे:
- भगवान गणेश
- नंदी महाराज
- नाग देवता
- कुछ स्थानों पर माता पार्वती की प्रतिमा
ये सभी प्रतिमाएँ भक्तों को अलग-अलग रूपों में आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
मंदिर के अंदर देखने योग्य स्थान (Places to See Inside the Temple)
अमर बावड़ी
यह मंदिर का सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमयी स्थल माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इसका जल कभी समाप्त नहीं होता और यह भगवान श्रीराम के समय से जुड़ा हुआ है।
मुख्य शिवलिंग
मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव का पवित्र शिवलिंग है, जहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया जाता है।
नागदेव मंदिर
मंदिर परिसर में स्थित यह स्थान नागदेव की आराधना के लिए प्रसिद्ध है। श्रद्धालु यहां विशेष रूप से नाग पंचमी के अवसर पर दर्शन करते हैं।
स्वयंभू श्रीगणेश मंदिर
यह मंदिर परिसर का अत्यंत लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। श्रद्धालु शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले यहां दर्शन करना शुभ मानते हैं।
प्राकृतिक हरियाली और प्राचीन वृक्ष
मंदिर परिसर के विशाल वृक्ष और हरियाली इसे आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला स्थान बनाते हैं।
विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और रोशनी से भव्य रूप से सजाया जाता है।
आरती, भजन और पूजा-पद्धति (Aarti and Rituals)
मंदिर में प्रतिदिन नियमित पूजा-अर्चना की जाती है।
- प्रातःकालीन आरती
- संध्या आरती
- सोमवार और सावन मास में विशेष अभिषेक
- महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण और विशेष पूजन
भक्त दूध, जल, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। भजन-कीर्तन के दौरान पूरा वातावरण “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठता है।
प्रमुख त्योहार और कार्यक्रम (Festivals and Events)
मंदिर में निम्न प्रमुख उत्सव बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं:
- महाशिवरात्रि
- सावन मास के सोमवार
- नाग पंचमी
- श्रावण मास में विशेष धार्मिक आयोजन
सेंधवा किला, बड़वानी (Sendhwa Fort, Barwani)
महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों श्रद्धालु रात्रि भर पूजा-अर्चना करते हैं और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मंदिर की समय-सारणी (Temple Timings)
- प्रातः खुलने का समय: लगभग 5:30 बजे
- रात्रि बंद होने का समय: लगभग 8:30 बजे
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय में परिवर्तन संभव है।
मंदिर के आसपास दर्शनीय स्थल (Nearby Attractions)
यदि आप श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन के लिए बड़वानी आ रहे हैं, तो केवल मंदिर तक सीमित न रहें। बड़वानी और उसके आसपास कई ऐसे धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जो आपकी यात्रा को और भी यादगार बना सकते हैं। नर्मदा घाटी की गोद में बसे ये स्थान आध्यात्मिकता, प्रकृति और इतिहास का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं।
बावनगजा जैन तीर्थ (Bawangaja Jain Pilgrimage Site)
बड़वानी से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित बावनगजा भारत के सबसे प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थलों में से एक है। यहां भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) की लगभग 84 फीट ऊंची एकाश्म प्रतिमा स्थापित है, जिसे विश्व की सबसे ऊंची जैन प्रतिमाओं में गिना जाता है। पहाड़ी पर स्थित यह प्रतिमा दूर से ही दिखाई देने लगती है। यहां पहुंचने के लिए सीढ़ियों का मार्ग बनाया गया है। पहाड़ी के ऊपर से आसपास के क्षेत्र का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।
राजघाट नर्मदा तट (Rajghat Narmada Ghat)
नर्मदा नदी के किनारे स्थित राजघाट बड़वानी के सबसे शांत और पवित्र स्थानों में से एक है। यहां श्रद्धालु नर्मदा स्नान, पूजा और ध्यान के लिए पहुंचते हैं। सुबह सूर्योदय और शाम सूर्यास्त के समय घाट का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। नर्मदा की लहरों की मधुर ध्वनि और घाट पर होने वाली आरती एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। यदि आप मंदिर दर्शन के बाद कुछ समय शांति और प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं, तो राजघाट अवश्य जाएं।
सिद्धेश्वर महादेव मंदिर (Siddheshwar Mahadev Temple)
भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन मंदिर बड़वानी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। श्रावण मास और महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है। मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और भक्तिमय रहता है। स्थानीय श्रद्धालु इसे बड़वानी के प्राचीन शिव धामों में से एक मानते हैं। यदि आप शिव भक्त हैं, तो श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर के साथ सिद्धेश्वर महादेव के दर्शन भी अवश्य करें।
नांगलवाड़ी धाम (Nangalwadi Dham)
बड़वानी जिले का यह प्रसिद्ध धार्मिक स्थल विशेष रूप से आदिवासी संस्कृति और लोक आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां स्थित भिलात देव मंदिर दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्राकृतिक पहाड़ियों और हरियाली से घिरा यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।
अंजड़ नगर (Anjad Town)
बड़वानी से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित अंजड़ एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगर है। यहां कई प्राचीन मंदिर और स्थानीय धार्मिक स्थल मौजूद हैं। नगर का सांस्कृतिक वातावरण और पारंपरिक बाजार स्थानीय जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर प्रदान करते हैं। यदि आप बड़वानी क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को समझना चाहते हैं, तो अंजड़ की यात्रा आपके लिए रोचक साबित हो सकती है।
बीजासन माता मंदिर (Bijasan Mata Temple)
बड़वानी क्षेत्र में स्थित यह शक्तिपीठ माता दुर्गा के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। नवरात्रि के दौरान यहां विशाल मेले और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां से आसपास का प्राकृतिक दृश्य भी बेहद सुंदर दिखाई देता है। श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ-साथ प्रकृति का आनंद भी लेते हैं।
शूलपाणेश्वर क्षेत्र (Shoolpaneshwar Region)
मध्य प्रदेश और गुजरात की सीमा के निकट स्थित यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यहां का वातावरण रोमांच और आध्यात्मिकता दोनों का अनुभव कराता है। प्रकृति प्रेमी, ट्रैकिंग के शौकीन और धार्मिक यात्री इस क्षेत्र को विशेष रूप से पसंद करते हैं। वर्षा ऋतु में यहां की हरियाली और भी आकर्षक हो जाती है।
नर्मदा नदी के प्राकृतिक तट और घाट
बड़वानी क्षेत्र में नर्मदा नदी के अनेक छोटे-बड़े घाट और प्राकृतिक तट मौजूद हैं। इनमें से कई स्थान अभी भी पर्यटन की दृष्टि से कम प्रसिद्ध हैं, जिसके कारण यहां शांति और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा अनुभव मिलता है। परिवार के साथ कुछ समय बिताने, ध्यान करने या फोटोग्राफी के लिए ये स्थान अत्यंत उपयुक्त हैं।
स्थानीय वन क्षेत्र और प्राकृतिक हरियाली
श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक हरियाली और वनस्पतियों से समृद्ध है। मंदिर परिसर में भी कई पुराने वृक्ष और औषधीय पौधे मौजूद हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। प्रकृति और आध्यात्मिकता का यह अनूठा संगम यहां आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष अनुभव प्रदान करता है।
इन सभी स्थलों को मिलाकर देखा जाए तो श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर की यात्रा केवल एक मंदिर दर्शन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह नर्मदा अंचल की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को करीब से जानने का एक शानदार अवसर बन जाती है।
ध्यान देने योग्य बातें (Important Things to Keep in Mind)
श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर की यात्रा को सुखद और व्यवस्थित बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
- मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखें।
- पूजा-अर्चना के दौरान अनुशासन और शांति बनाए रखें।
- अमर बावड़ी के पवित्र जल का सम्मान करें।
- धार्मिक स्थलों पर ऊंची आवाज में बातचीत से बचें।
- मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन वृक्षों और प्राकृतिक वनस्पतियों को नुकसान न पहुंचाएं।
- नागदेव मंदिर के आसपास सावधानी बरतें और किसी भी जीव-जंतु को परेशान न करें।
- त्योहारों के दौरान भीड़ अधिक होने पर अपने सामान का ध्यान रखें।
- फोटोग्राफी करने से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी प्राप्त कर लें।
- प्रसाद और पूजा सामग्री निर्धारित स्थानों पर ही अर्पित करें।
- बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करते समय विशेष सावधानी रखें।
पूरा पता (Full Address)
श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर
बड़वानी शहर
जिला – बड़वानी
राज्य – मध्यप्रदेश
पिन कोड – 451551
रामगढ़ का किला, बड़वानी (Ramgarh Fort, Barwani)
यात्रा मार्गदर्शिका (Travel Guide)
सड़क मार्ग: बड़वानी मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। इंदौर, खंडवा और धार से बस व टैक्सी सुविधा उपलब्ध है।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन सेंधवा या खंडवा है, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा बड़वानी पहुँचा जा सकता है।
हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा Devi Ahilya Bai Holkar Airport है, जो इंदौर में स्थित है। वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा बड़वानी पहुँचा जा सकता है।
यदि आप आध्यात्मिक शांति, पौराणिक आस्था और शिवभक्ति का दिव्य अनुभव करना चाहते हैं, तो श्रीरामकुल्लेश्वर महादेव मंदिर बड़वानी की यात्रा अवश्य करें। यहाँ का वातावरण मन को शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
श्री रामकुलेश्वर महादेव मंदिर बड़वानी की छवियाँ (Images of Shri Ramkulleshwar Mahadev Temple Barwani)



तीर गोला स्मारक, बड़वानी (Tir Gola Memorial, Barwani)


