
मध्य प्रदेश का सिवनी जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, प्राचीन धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। इन्हीं धरोहरों में एक ऐसा किला भी मौजूद है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन जो अपने भीतर सदियों पुराने इतिहास की अनेक कहानियाँ समेटे हुए है। यह है आदेगांव किला (Adegaon Fort), जो सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के अंतर्गत स्थित आदेगांव गाँव में बना हुआ है। सतपुड़ा की पर्वतमालाओं और हरियाली से घिरा यह किला इतिहास प्रेमियों, प्रकृति प्रेमियों और ऑफबीट पर्यटन पसंद करने वाले यात्रियों के लिए किसी छिपे हुए खजाने से कम नहीं है।
आदेगांव किला भले ही आज बड़े पर्यटन स्थलों की तरह प्रसिद्ध न हो, लेकिन इसकी ऐतिहासिक विरासत, विशाल पत्थर की दीवारें और शांत वातावरण इसे एक विशेष पहचान प्रदान करते हैं। समय के साथ किले का कुछ भाग खंडहर में बदल चुका है, फिर भी इसकी मजबूत संरचना और प्राचीन स्थापत्य उस दौर की कहानी बयां करते हैं, जब यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था। किले की ऊँचाई से आसपास के गाँव, खेत और सतपुड़ा क्षेत्र का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है, जो यहाँ आने वाले प्रत्येक पर्यटक को आकर्षित करता है।
यदि आप भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से हटकर किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहाँ इतिहास, प्रकृति और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिले, तो आदेगांव किला निश्चित रूप से आपकी यात्रा सूची में शामिल होना चाहिए। यहाँ का शांत वातावरण, ताजी हवा और ऐतिहासिक अवशेष आपको अतीत की उस दुनिया में ले जाते हैं जहाँ कभी सैनिकों की गतिविधियाँ और शासकों की रणनीतियाँ गूँजती थीं। यही कारण है कि यह किला धीरे-धीरे इतिहास और हेरिटेज पर्यटन के शौकीनों के बीच अपनी पहचान बना रहा है।
आदेगॉव किला लखनादौन से लगभग 18 किलोमीटर दूर आदेगांव नामक गाँव के पास स्थित है। यह किला भले ही बड़े पर्यटन मानचित्रों में अधिक चर्चित न हो, लेकिन इतिहास प्रेमियों और शांत जगहों की तलाश करने वालों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। किले के आसपास का ग्रामीण वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाते हैं।
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किले का इतिहास (History of the Fort)

आदेगांव किला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के आदेगांव गाँव में स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक दुर्ग है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। यद्यपि किले के निर्माण वर्ष और निर्माता के संबंध में कोई स्पष्ट शिलालेख या आधिकारिक ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी स्थानीय परंपराओं, क्षेत्रीय इतिहास और उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर इसकी प्राचीनता का अनुमान लगाया जाता है।
माना जाता है कि इस किले का निर्माण 18वीं शताब्दी के आसपास हुआ था, जब इस क्षेत्र पर मराठा शासकों का प्रभाव स्थापित हो चुका था। इतिहासकारों के अनुसार नागपुर के शासक रघुजी भोंसले के शासनकाल में सिवनी और लखनादौन क्षेत्र सामरिक तथा प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थे। इसी कारण आदेगांव जैसे स्थानों पर मजबूत दुर्गों का निर्माण कराया गया, ताकि व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, प्रशासनिक नियंत्रण और क्षेत्र की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके। कुछ स्थानीय मान्यताओं के अनुसार किले का संबंध तत्कालीन धार्मिक और प्रशासनिक गतिविधियों से भी रहा है, जिससे यह केवल एक सैनिक चौकी न होकर क्षेत्रीय शासन व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।
सिवनी और लखनादौन का इलाका प्राचीन काल से उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल रहा है। सतपुड़ा पर्वतमाला से होकर गुजरने वाले इन मार्गों पर व्यापारिक कारवाँ, सैनिक टुकड़ियाँ और शासकीय अधिकारी लगातार आवागमन करते थे। ऐसे में ऊँचाई पर स्थित इस किले से आसपास के विस्तृत क्षेत्र पर आसानी से निगरानी रखी जा सकती थी, जो इसकी सामरिक उपयोगिता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
समय के साथ इस क्षेत्र पर मराठाओं के बाद अंग्रेजों का प्रभाव बढ़ा और किले का सैन्य महत्व धीरे-धीरे कम होता गया। स्वतंत्रता के पश्चात यह किला ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पहचाना जाने लगा। वर्तमान में भले ही इसका कुछ भाग खंडहर में परिवर्तित हो चुका है, लेकिन इसकी विशाल पत्थर की दीवारें, प्राचीन अवशेष और मजबूत निर्माण शैली आज भी उस गौरवशाली अतीत की याद दिलाती हैं। आज आदेगांव किला इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एक आकर्षक विरासत स्थल के रूप में उभर रहा है तथा सिवनी जिले की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में इसकी गणना की जाती है।
विशेषताएँ (Special Features)

आदेगॉव किले की सबसे बड़ी विशेषता इसका शांत और रहस्यमय वातावरण है। किले की प्राचीन दीवारें और टूटे-फूटे अवशेष, अंदर स्थित धार्मिक स्थल, चारों ओर फैला हरा-भरा प्राकृतिक दृश्य और ग्रामीण संस्कृति की झलक इसे खास बनाती है। यह स्थान इतिहास, धर्म और प्रकृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
किले के अंदर देखने लायक स्थान (Places to See Inside the Fort)
आदेगांव किला भले ही आज आंशिक रूप से खंडहर का रूप ले चुका हो, लेकिन इसके भीतर मौजूद प्राचीन संरचनाएँ, विशाल दीवारें और प्राकृतिक दृश्य आज भी पर्यटकों को इतिहास के स्वर्णिम युग की झलक दिखाते हैं। यहाँ घूमते समय आपको ऐसा महसूस होता है मानो आप कई शताब्दियों पुराने किसी दुर्ग में प्रवेश कर चुके हों। किले का प्रत्येक हिस्सा अपनी अलग कहानी कहता है और इतिहास तथा प्रकृति का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।
मुख्य प्रवेश द्वार (Main Entrance Gate)
किले का प्रवेश द्वार इसकी सबसे आकर्षक संरचनाओं में से एक है। यद्यपि समय के साथ इसका कुछ भाग क्षतिग्रस्त हो चुका है, फिर भी इसकी विशाल पत्थर की बनावट उस समय की उत्कृष्ट निर्माण तकनीक का परिचय देती है। इस द्वार से प्रवेश करते ही किले की ऐतिहासिक भव्यता का अनुभव होने लगता है।
प्राचीन पत्थर की दीवारें (Ancient Fort Walls)
आदेगांव किले की मोटी और मजबूत पत्थर की दीवारें इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। इन दीवारों का निर्माण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया था। आज भी कई स्थानों पर इनकी मजबूती देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि यह किला कभी कितना सुदृढ़ रहा होगा।
प्राचीन प्रांगण (Central Courtyard)
किले के भीतर एक खुला क्षेत्र दिखाई देता है, जहाँ कभी सैनिकों, अधिकारियों या प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन होता होगा। वर्तमान में यह स्थान खंडहर जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसकी संरचना उस समय की योजनाबद्ध वास्तुकला को दर्शाती है।
निगरानी स्थल (Watch Point)
किले के ऊँचे हिस्सों से आसपास का विस्तृत ग्रामीण क्षेत्र, खेत और सतपुड़ा की हरियाली स्पष्ट दिखाई देती है। प्राचीन समय में यही स्थान सैनिकों के लिए निगरानी बिंदु रहा होगा। आज यह पर्यटकों के लिए बेहतरीन व्यू पॉइंट और फोटोग्राफी स्पॉट है।
प्राकृतिक वातावरण (Natural Surroundings)
किले की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका प्राकृतिक वातावरण है। चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और पक्षियों की मधुर आवाजें इस स्थान को प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षक बनाती हैं। विशेष रूप से वर्षा ऋतु में पूरा क्षेत्र हरे-भरे जंगलों से ढक जाता है और किले की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।
पायली रेस्ट हाउस घंसौर सिवनी (Payli Rest House Ghansour Seoni)
यात्रा के लिए उपयुक्त समय
आदेगांव किला पूरे वर्ष देखा जा सकता है, लेकिन अक्टूबर से मार्च के बीच का मौसम सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और किले में आराम से घूमने का आनंद लिया जा सकता है।
यदि आपको हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता पसंद है, तो जुलाई से सितंबर के बीच वर्षा ऋतु में भी यहाँ आ सकते हैं। इस समय सतपुड़ा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है और किले का दृश्य अत्यंत आकर्षक दिखाई देता है। हालांकि बारिश के दौरान पत्थर फिसलन भरे हो सकते हैं, इसलिए सावधानी बरतना आवश्यक है।
गर्मियों में दोपहर के समय तापमान अधिक रहता है, इसलिए सुबह या शाम के समय यात्रा करना अधिक सुविधाजनक रहता है।
समय और प्रवेश शुल्क (Timing & Entry Fee)
किला सामान्यतः सुबह 5:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक खुला रहता है। वर्तमान में यहाँ कोई निश्चित प्रवेश शुल्क निर्धारित नहीं है। विशेष अवसरों या स्थानीय आयोजनों के समय व्यवस्था में परिवर्तन हो सकता है।
आसपास के दर्शनीय स्थल (Nearby Attractions)
आदेगांव किले की यात्रा के साथ-साथ आसपास स्थित कई प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों को भी देखा जा सकता है। यदि आप एक दिन या सप्ताहांत की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन स्थानों को अपनी ट्रिप में अवश्य शामिल करें।
पेंच राष्ट्रीय उद्यान (Pench National Park)
आदेगांव से कुछ दूरी पर स्थित पेंच राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व में से एक है। यह पार्क बंगाल टाइगर, तेंदुआ, जंगली कुत्ता, गौर, सांभर, चीतल और सैकड़ों पक्षी प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है। जंगल सफारी का रोमांच और सतपुड़ा के घने जंगल प्रकृति प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करते हैं।
लखनादौन (Lakhnadon)
आदेगांव किले से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित लखनादौन एक प्रमुख कस्बा है। यहाँ स्थानीय बाजार, पारंपरिक भोजन, आवश्यक सुविधाएँ तथा आसपास के ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिलती है। यदि आपको स्थानीय संस्कृति को करीब से जानना पसंद है, तो लखनादौन अवश्य जाएँ।
सिवनी शहर (Seoni City)
सिवनी जिला मुख्यालय अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहाँ कई मंदिर, स्थानीय बाजार और अन्य पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जिन्हें आदेगांव किले की यात्रा के साथ जोड़ा जा सकता है।
घंसौर (Ghansaur)
घंसौर क्षेत्र अपनी हरियाली, ग्रामीण परिवेश और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यदि आप भीड़-भाड़ से दूर प्राकृतिक माहौल में समय बिताना चाहते हैं, तो यह स्थान अच्छा विकल्प हो सकता है।
सतपुड़ा का प्राकृतिक क्षेत्र (Satpura Landscape)
आदेगांव के चारों ओर फैली सतपुड़ा पर्वतमाला इस यात्रा को और भी खास बनाती है। विशेषकर मानसून और सर्दियों के मौसम में यहाँ का प्राकृतिक दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। फोटोग्राफी, प्रकृति अवलोकन और शांत वातावरण का आनंद लेने के लिए यह क्षेत्र उपयुक्त है।
ध्यान देने योग्य बातें (Important Tips)
आदेगांव किला एक ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित स्थल भी है। इसलिए यहाँ घूमते समय कुछ आवश्यक बातों का ध्यान रखना आपकी यात्रा को सुरक्षित और सुखद बना सकता है।
सबसे पहले, आरामदायक स्पोर्ट्स शूज़ या मजबूत जूते पहनकर जाएँ क्योंकि किले के भीतर पत्थर, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और कुछ स्थानों पर चढ़ाई भी है। वर्षा ऋतु में पत्थर फिसलन भरे हो सकते हैं, इसलिए अतिरिक्त सावधानी बरतें।
किले की दीवारों पर चढ़ने, पत्थरों को नुकसान पहुँचाने या किसी भी ऐतिहासिक संरचना पर नाम लिखने से बचें। यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इसका संरक्षण प्रत्येक पर्यटक की जिम्मेदारी है।
यदि आप गर्मियों में यात्रा कर रहे हैं, तो अपने साथ पर्याप्त मात्रा में पानी, टोपी, सनस्क्रीन और हल्के कपड़े अवश्य रखें। सुबह या शाम का समय भ्रमण के लिए अधिक उपयुक्त रहता है।
किले के आसपास भोजन और अन्य सुविधाएँ सीमित हो सकती हैं। इसलिए आवश्यकतानुसार पानी, हल्का नाश्ता और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री साथ रखना बेहतर रहेगा।
फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान अत्यंत सुंदर है, लेकिन किसी भी खतरनाक किनारे या कमजोर दीवार पर खड़े होकर फोटो लेने से बचें।
यदि परिवार या छोटे बच्चों के साथ जा रहे हैं, तो उन पर विशेष ध्यान रखें। किले के कुछ हिस्से पुराने और जर्जर हैं, जहाँ सावधानी आवश्यक है।
यात्रा के दौरान प्लास्टिक या अन्य कचरा इधर-उधर न फेंकें। अपने साथ लाया गया कचरा वापस लेकर जाएँ या निर्धारित स्थान पर ही डालें, ताकि यह ऐतिहासिक स्थल स्वच्छ और सुरक्षित बना रहे।
पूरा पता (Full Address)
आदेगॉव किला, ग्राम – आदेगांव, तहसील – लखनादौन,
जिला – सिवनी, मध्य प्रदेश – 480887
पूरा यात्रा मार्गदर्शक (Full Travel Guide)
आदेगांव किले तक कैसे पहुँचे?
आदेगांव किला सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। लखनादौन से इसकी दूरी लगभग 18 किलोमीटर है, जिसे निजी वाहन, टैक्सी या स्थानीय परिवहन के माध्यम से आसानी से तय किया जा सकता है।
सड़क मार्ग (By Road)
यदि आप जबलपुर, सिवनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा या नागपुर से आ रहे हैं, तो राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से पहले लखनादौन पहुँचें। वहाँ से आदेगांव गाँव के लिए स्थानीय सड़क उपलब्ध है। निजी कार या बाइक से यात्रा करना सबसे सुविधाजनक विकल्प माना जाता है।
रेल मार्ग (By Train)
आदेगांव के लिए कोई सीधा रेलवे स्टेशन नहीं है। निकटतम रेलवे स्टेशन घंसौर है। इसके अलावा सिवनी और जबलपुर रेलवे स्टेशन भी प्रमुख विकल्प हैं। स्टेशन से टैक्सी या बस द्वारा लखनादौन होते हुए आदेगांव पहुँचा जा सकता है।
हवाई मार्ग (By Air)
निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर का डुमना एयरपोर्ट है, जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा लखनादौन और फिर आदेगांव किला पहुँचा जा सकता है। नागपुर एयरपोर्ट भी कुछ यात्रियों के लिए सुविधाजनक विकल्प हो सकता है।
यात्रा का सुझाव
यदि आप एक दिन की यात्रा कर रहे हैं, तो सुबह जल्दी लखनादौन पहुँचकर सबसे पहले आदेगांव किला देखें। इसके बाद समय मिलने पर आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों या सिवनी शहर की ओर भी जा सकते हैं। यदि आपकी रुचि वन्यजीव पर्यटन में है, तो अगले दिन पेंच राष्ट्रीय उद्यान की सफारी को भी अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। इस प्रकार इतिहास, प्रकृति और रोमांच का बेहतरीन संयोजन आपकी यात्रा को यादगार बना देगा।
श्री काल भैरव मंदिर आदेगॉव, सिवनी (Shri Kaal Bhairav Temple Adegaon, Seoni)
अदेगांव किला, लखनादौन की तस्वीरें (Images of Adegaon Fort, Lakhnadon)





निष्कर्ष (Conclusion)
आदेगॉव किला केवल पत्थरों का ढाँचा नहीं, बल्कि सिवनी जिले की ऐतिहासिक धरोहर है। यह स्थान उन लोगों के लिए स्वर्ग है जो भीड़-भाड़ से दूर शांति, इतिहास और रोमांच का अनुभव करना चाहते हैं। अगर आप लखनादौन या सिवनी की यात्रा पर हैं, तो इस किले को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें।
बंजारी माता मंदिर सिवनी (Banjari Mata Mandir Seoni)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. आदेगांव किला कहाँ स्थित है?
आदेगांव किला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के अंतर्गत स्थित आदेगांव गाँव में है। यह लखनादौन से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है।
2. आदेगांव किले का निर्माण कब हुआ था?
आधिकारिक ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन स्थानीय मान्यताओं और इतिहासकारों के अनुसार माना जाता है कि आदेगांव किले का निर्माण 18वीं शताब्दी के आसपास मराठा शासनकाल में हुआ था। इसका संबंध नागपुर के शासक रघुजी भोंसले के काल से भी जोड़ा जाता है।
3. आदेगांव किला किसलिए प्रसिद्ध है?
आदेगांव किला अपनी प्राचीन पत्थर की संरचना, सामरिक महत्व, सतपुड़ा क्षेत्र के सुंदर प्राकृतिक दृश्यों और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यह इतिहास प्रेमियों, फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
4. आदेगांव किला घूमने का समय क्या है?
पर्यटक प्रतिदिन सुबह लगभग 5:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक आदेगांव किला घूम सकते हैं। हालांकि, यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन से समय की पुष्टि कर लेना उचित रहता है।
5. क्या आदेगांव किला देखने के लिए प्रवेश शुल्क देना पड़ता है?
नहीं। वर्तमान में आदेगांव किले में प्रवेश के लिए किसी प्रकार का टिकट या प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता। पर्यटक यहाँ निःशुल्क भ्रमण कर सकते हैं।
6. आदेगांव किला घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
आदेगांव किला घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि आप हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना चाहते हैं, तो मानसून के बाद का मौसम भी बेहद आकर्षक रहता है।
7. आदेगांव किले तक कैसे पहुँचा जा सकता है?
आदेगांव किला सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम प्रमुख कस्बा लखनादौन है। निकटतम रेलवे स्टेशन घंसौर है, जबकि जबलपुर और सिवनी से भी सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर का डुमना एयरपोर्ट है।
8. आदेगांव किले के अंदर क्या-क्या देखने को मिलता है?
किले के भीतर प्राचीन प्रवेश द्वार, विशाल पत्थर की दीवारें, पुराने निर्माणों के अवशेष, खुला प्रांगण, ऊँचे निगरानी स्थल और सतपुड़ा क्षेत्र के मनोरम प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं।
9. आदेगांव किले के आसपास कौन-कौन से पर्यटन स्थल हैं?
आदेगांव किले के आसपास लखनादौन, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, सिवनी शहर, घंसौर तथा सतपुड़ा क्षेत्र के प्राकृतिक स्थल प्रमुख आकर्षण हैं।
10. क्या आदेगांव किला परिवार के साथ घूमने के लिए उपयुक्त है?
हाँ। आदेगांव किला परिवार, दोस्तों, इतिहास प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अच्छा पर्यटन स्थल है। हालांकि, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करते समय किले के पुराने एवं ऊबड़-खाबड़ हिस्सों में सावधानी बरतनी चाहिए।
11. आदेगांव किले में घूमने में कितना समय लगता है?
आदेगांव किले का आराम से भ्रमण करने में लगभग 1 से 2 घंटे का समय लगता है। यदि आप फोटोग्राफी और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेना चाहते हैं, तो अधिक समय भी दे सकते हैं।
12. क्या आदेगांव किले में फोटोग्राफी की जा सकती है?
हाँ। व्यक्तिगत उपयोग के लिए फोटोग्राफी की जा सकती है। किले की प्राचीन संरचना, प्राकृतिक वातावरण और ऊँचाई से दिखाई देने वाले दृश्य फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं।


