
मध्य प्रदेश का नरसिंहपुर जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राचीन स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं धरोहरों में एक ऐसा किला भी शामिल है, जो कभी गोंड साम्राज्य की सैन्य शक्ति, रणनीतिक सूझबूझ और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण हुआ करता था। यह है चौगान का किला, जिसे कई लोग चौरागढ़ किला के नाम से भी जानते हैं। सतपुड़ा पर्वतमाला की ऊँची पहाड़ियों पर स्थित यह किला आज भले ही खंडहरों में बदल चुका हो, लेकिन इसकी दीवारें आज भी वीरता, संघर्ष और गौरवशाली इतिहास की कहानी सुनाती हैं।
घने जंगलों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह किला उन लोगों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है, जिन्हें इतिहास, ट्रैकिंग, पुरातत्व और प्रकृति से प्रेम है। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहाँ पहुँचते ही चारों ओर फैली हरियाली, दूर-दूर तक दिखाई देने वाली पर्वत श्रृंखलाएँ और शांत वातावरण मन को सुकून से भर देते हैं। यही कारण है कि इतिहास प्रेमियों के साथ-साथ फोटोग्राफर और एडवेंचर प्रेमी भी यहाँ बड़ी संख्या में आते हैं।
इतिहासकारों के अनुसार इस किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में गोंड शासक संग्राम शाह द्वारा कराया गया था। बाद में यह गोंड राजाओं की एक महत्वपूर्ण सैन्य चौकी और प्रशासनिक केंद्र बना। समय के साथ हुए युद्धों और अंग्रेजों के हमलों ने इस भव्य किले को काफी नुकसान पहुँचाया, लेकिन इसके अवशेष आज भी इसकी भव्यता का प्रमाण देते हैं।
यदि आप नरसिंहपुर या उसके आसपास घूमने की योजना बना रहे हैं, तो चौगान का किला आपके लिए एक ऐसा ऐतिहासिक स्थल है जहाँ इतिहास, रोमांच और प्रकृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहाँ की यात्रा केवल एक पर्यटन अनुभव नहीं, बल्कि मध्य भारत के गौरवशाली अतीत से रूबरू होने का अवसर भी है।
बिल्धा 5 स्टेप वॉटरफॉल, नरसिंहपुर (Bildha 5 Step Waterfall, Narsinghpur)
चौगान (चौरागढ़) किले का इतिहास (History of Chaugan / Chauragarh Fort)

चौगान का किला मध्य भारत के गोंड शासन के गौरवशाली इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार इसका निर्माण लगभग 16वीं शताब्दी में गढ़ा-कटंगा राज्य के प्रसिद्ध गोंड शासक राजा संग्राम शाह ने करवाया था। संग्राम शाह अपने शासनकाल में अनेक किलों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध थे और कहा जाता है कि उन्होंने अपने साम्राज्य की सुरक्षा के लिए लगभग 52 गढ़ों का निर्माण कराया था। चौगान का किला भी उन्हीं महत्वपूर्ण दुर्गों में से एक था।
सतपुड़ा की ऊँची पहाड़ियों पर स्थित होने के कारण यह किला सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था। यहाँ से दूर-दूर तक आने-जाने वाले मार्गों और आसपास के क्षेत्रों पर आसानी से निगरानी रखी जा सकती थी। यही कारण था कि गोंड शासकों ने इसे अपनी एक मजबूत सुरक्षा चौकी के रूप में विकसित किया। किले के भीतर राजमहल, सैनिकों के रहने के स्थान, जलस्रोत, मंदिर तथा प्रशासनिक भवन बनाए गए थे, जिससे यह लंबे समय तक आत्मनिर्भर बना रहता था।
समय के साथ गोंड साम्राज्य कमजोर होने लगा और विभिन्न शासकों के बीच सत्ता संघर्ष शुरू हुआ। बाद के वर्षों में यह क्षेत्र मराठों और अंग्रेजों के प्रभाव में आया। वर्ष 1816 में अंग्रेजों ने इस किले को अपनी सैन्य रणनीति के तहत काफी हद तक क्षतिग्रस्त कर दिया ताकि भविष्य में इसका उपयोग विद्रोहियों या स्थानीय शासकों द्वारा न किया जा सके। इसके बाद यह किला धीरे-धीरे वीरान होता गया और प्राकृतिक वनस्पतियों ने इसे अपने आगोश में ले लिया।
आज भले ही किला अपने मूल स्वरूप में मौजूद नहीं है, लेकिन इसकी विशाल दीवारें, प्राचीन द्वार, रेवाकुंड, महलों के अवशेष और मंदिर उस स्वर्णिम युग की याद दिलाते हैं जब यह गोंड साम्राज्य की शक्ति और समृद्धि का प्रतीक हुआ करता था। यही ऐतिहासिक महत्व इसे नरसिंहपुर जिले की सबसे महत्वपूर्ण विरासतों में शामिल करता है।
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चौगान / चौरागढ़ किले की विशेषताएँ (Key Features)
चौगान का किला केवल एक प्राचीन दुर्ग नहीं, बल्कि गोंडकालीन स्थापत्य कला, सैन्य रणनीति और प्राकृतिक सुरक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण है। सतपुड़ा पर्वतमाला की ऊँची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यह किला चारों ओर से प्राकृतिक रूप से सुरक्षित था। इसकी यही विशेषता इसे उस समय के सबसे मजबूत पहाड़ी किलों में शामिल करती थी। किले का निर्माण इस प्रकार किया गया था कि दुश्मन सेना के लिए यहाँ तक पहुँचना आसान नहीं था। ऊँचाई से आसपास के विशाल क्षेत्र पर निगरानी रखी जा सकती थी, जिससे किसी भी खतरे का समय रहते पता चल जाता था।
किले की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसके तीन विशाल प्रवेश द्वार हैं। ये द्वार इस प्रकार बनाए गए थे कि एक के बाद एक सुरक्षा परत तैयार होती थी। यदि कोई शत्रु पहले द्वार को पार भी कर ले, तो अगले द्वारों तक पहुँचते-पहुँचते उसकी गति धीमी हो जाती थी। यह उस समय की उन्नत सैन्य योजना का प्रमाण है।
किले के भीतर स्थित रेवाकुंड इसकी जल प्रबंधन प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण है। पहाड़ी पर होने के बावजूद वर्षभर पानी उपलब्ध रहे, इसके लिए इस कुंड का निर्माण किया गया था। इसके अलावा यहाँ बने सीढ़ीदार कुएँ भी गोंडकालीन जल संरक्षण तकनीक को दर्शाते हैं। यह व्यवस्था उस समय के इंजीनियरिंग कौशल की मिसाल मानी जाती है।
चौगान किले में कभी रंगमहल, राजा प्रेम नारायण शाह का महल, रानीमहल तथा नरसिंह मंदिर भी हुआ करते थे। आज इनके केवल अवशेष बचे हैं, लेकिन इन्हें देखकर उस समय की भव्यता का अनुमान लगाया जा सकता है। मोटी पत्थर की दीवारें, विशाल प्राचीर और प्राकृतिक चट्टानों का उपयोग यह दर्शाता है कि किले का निर्माण मजबूती और दीर्घायु को ध्यान में रखकर किया गया था।
प्राकृतिक दृष्टि से भी यह स्थान अत्यंत आकर्षक है। किले के चारों ओर फैले घने जंगल, पर्वत श्रृंखलाएँ और शांत वातावरण इसे इतिहास और प्रकृति का अनूठा संगम बनाते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ का दृश्य विशेष रूप से मनमोहक दिखाई देता है, इसलिए यह स्थान फोटोग्राफी और ट्रैकिंग के शौकीनों के बीच भी लोकप्रिय है।
किले के अंदर देखने योग्य स्थान (Things to See Inside the Fort)
1. मुख्य प्रवेश द्वार (Main Entrance Gate)
चौगान किले का मुख्य प्रवेश द्वार इसकी सबसे प्रभावशाली संरचनाओं में से एक है। मोटे पत्थरों से निर्मित यह द्वार गोंडकालीन स्थापत्य शैली का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। यद्यपि समय के साथ इसका कुछ भाग क्षतिग्रस्त हो चुका है, फिर भी इसकी विशालता आज भी पर्यटकों को प्रभावित करती है। इस द्वार से प्रवेश करते ही ऐसा महसूस होता है जैसे आप कई सौ वर्ष पुराने इतिहास में प्रवेश कर रहे हों। यहाँ खड़े होकर किले की सुरक्षा व्यवस्था और उस समय की सैन्य योजना का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
2. दूसरा एवं तीसरा सुरक्षा द्वार
मुख्य द्वार के आगे बढ़ने पर दूसरे और तीसरे सुरक्षा द्वार के अवशेष दिखाई देते हैं। इन द्वारों का निर्माण दुश्मनों की गति को रोकने और किले की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया था। प्रत्येक द्वार के बीच पर्याप्त दूरी रखी गई थी ताकि यदि कोई सेना पहले द्वार को पार भी कर ले, तो आगे बढ़ना उसके लिए कठिन हो जाए। यह गोंड शासकों की उत्कृष्ट सैन्य रणनीति का प्रमाण माना जाता है।
3. रेवाकुंड (Rewa Kund)
रेवाकुंड चौगान किले का सबसे महत्वपूर्ण जलस्रोत था। पहाड़ी पर स्थित इस किले में वर्षभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इसका निर्माण किया गया था। माना जाता है कि यहाँ का जल लंबे समय तक सुरक्षित रहता था और पूरे किले की आवश्यकताओं को पूरा करता था। आज भी यह कुंड पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है और गोंडकालीन जल संरक्षण प्रणाली का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
4. नरसिंह मंदिर
किले के भीतर स्थित प्राचीन नरसिंह मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि गोंड शासक यहाँ नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते थे। यद्यपि मंदिर का अधिकांश भाग समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुका है, फिर भी इसकी प्राचीन संरचना और धार्मिक महत्व आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर के आसपास का शांत वातावरण आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।
5. रंगमहल
रंगमहल कभी राजपरिवार के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। इतिहासकारों के अनुसार यहाँ नृत्य, संगीत तथा राजकीय समारोह आयोजित किए जाते थे। आज इसके केवल अवशेष शेष हैं, लेकिन विशाल पत्थर की दीवारें और संरचना इसकी पूर्व भव्यता का एहसास कराती हैं। इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह स्थान विशेष आकर्षण का केंद्र है।
6. राजा प्रेम नारायण शाह का महल एवं रानीमहल
किले के भीतर स्थित राजा प्रेम नारायण शाह का महल तथा रानीमहल आज खंडहर के रूप में दिखाई देते हैं। इन महलों की दीवारों, कमरों और स्थापत्य शैली को देखकर गोंडकालीन राजसी जीवन की झलक मिलती है। यद्यपि समय और प्राकृतिक प्रभावों ने इन्हें काफी नुकसान पहुँचाया है, फिर भी इनके अवशेष इस किले के स्वर्णिम इतिहास की कहानी सुनाते हैं। इन महलों के आसपास घूमते हुए पर्यटक उस युग की समृद्ध संस्कृति और शाही जीवनशैली की कल्पना सहज ही कर सकते हैं।
घूमने का समय (Visiting Timings)
- सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक
- प्रवेश शुल्क: वर्तमान में निःशुल्क
हनुमान टेकरी झोतेश्वर (Hanuman Tekri Jhoteshwar), नरसिंहपुर (Narsinghpur)
आसपास देखने योग्य स्थान (Nearby Attractions)
1. श्री नरसिंह मंदिर, चौगान
चौगान किले के निकट स्थित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। भगवान नरसिंह को समर्पित यह मंदिर स्थानीय लोगों के बीच अत्यंत श्रद्धा का विषय है। शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित यह मंदिर आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। किले की यात्रा के दौरान अधिकांश पर्यटक यहाँ दर्शन करने अवश्य आते हैं।
2. बरमान घाट (Barman Ghat)
नर्मदा नदी के तट पर स्थित बरमान घाट नरसिंहपुर जिले के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहाँ प्राचीन मंदिर, विशाल घाट और नर्मदा नदी का मनोरम दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। विशेष अवसरों पर यहाँ धार्मिक मेले भी आयोजित होते हैं। यदि आप इतिहास और धार्मिक पर्यटन दोनों का आनंद लेना चाहते हैं, तो बरमान घाट अवश्य जाएँ।
3. ब्रह्मांड घाट (Brahmand Ghat)
ब्रह्मांड घाट नर्मदा नदी के किनारे स्थित एक अत्यंत शांत और प्राकृतिक स्थल है। यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ सुबह और शाम के समय नदी का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक बेहतरीन स्थान माना जाता है।
4. सिंगौरगढ़ किला (Singorgarh Fort)
यदि आपको ऐतिहासिक किलों में रुचि है, तो चौगान किले के साथ सिंगौरगढ़ किले की यात्रा भी कर सकते हैं। यह किला रानी दुर्गावती और गोंड साम्राज्य के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यहाँ की विशाल प्राचीर, प्राचीन अवशेष और प्राकृतिक वातावरण इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
5. सतपुड़ा का वन क्षेत्र
चौगान किले के आसपास फैला सतपुड़ा का वन क्षेत्र जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहाँ विभिन्न प्रकार के वृक्ष, पक्षी और वन्यजीव देखने को मिल सकते हैं। यदि आप प्रकृति के बीच समय बिताना चाहते हैं, तो यह क्षेत्र आपको एक अलग ही अनुभव प्रदान करेगा। यहाँ की हरियाली और शांति मन को सुकून देती है।
ध्यान देने योग्य बातें (Important Tips)
चौगान का किला एक प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ-साथ सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच स्थित एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल भी है। यहाँ की यात्रा रोमांच से भरपूर होती है, लेकिन सुरक्षित और सुखद अनुभव के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे पहले, किले तक पहुँचने के लिए पहाड़ी मार्ग से पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। इसलिए आरामदायक ट्रैकिंग या स्पोर्ट्स शूज़ पहनकर ही जाएँ। सामान्य चप्पल या फिसलन वाले जूते दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
यात्रा के दौरान पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी, हल्का भोजन और आवश्यक दवाइयाँ अपने साथ रखें। किले के ऊपर भोजन, पेयजल या चिकित्सा जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। यदि आप गर्मियों में यात्रा कर रहे हैं, तो टोपी, धूप का चश्मा और सनस्क्रीन का उपयोग करें, क्योंकि दोपहर के समय धूप काफी तेज होती है।
मानसून के दौरान किले का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है, लेकिन बारिश के कारण रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं। ऐसे समय में सावधानीपूर्वक चलें और अनावश्यक जोखिम लेने से बचें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे हैं तो उन्हें अकेले आगे न जाने दें।
किला एक संरक्षित ऐतिहासिक धरोहर है, इसलिए इसकी दीवारों पर नाम लिखना, पत्थर तोड़ना या किसी भी प्रकार की क्षति पहुँचाना अनुचित और दंडनीय है। अपने साथ लाया गया प्लास्टिक, बोतलें या अन्य कचरा खुले में न फेंकें। स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक पर्यटक की जिम्मेदारी है।
यदि आप फोटोग्राफी के लिए जा रहे हैं, तो सुबह या शाम का समय सबसे उपयुक्त रहेगा। पहाड़ी के किनारों पर सेल्फी लेते समय विशेष सावधानी बरतें। चूँकि किला वन क्षेत्र के निकट स्थित है, इसलिए सूर्यास्त से पहले वापस लौटना बेहतर रहता है। समूह में यात्रा करना हमेशा अधिक सुरक्षित माना जाता है।
जबरेश्वर महादेव मंदिर, पिपरिया (नरसिंहपुर) (Jabareshwar Mahadev Temple, Pipariya – Narsinghpur)
पूरा पता (Full Address)
चौगान का किला (चौरागढ़ किला),
नरसिंहपुर जिला,
मध्य प्रदेश – 487001, भारत
पूरा ट्रैवल गाइड (Complete Travel Guide)
चौगान का किला सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। हालांकि किले तक पहुँचने के अंतिम चरण में पैदल ट्रैकिंग करनी पड़ती है, लेकिन रास्ता प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर होने के कारण यात्रा यादगार बन जाती है।
सड़क मार्ग (By Road)
नरसिंहपुर, गाडरवारा, जबलपुर, होशंगाबाद (नर्मदापुरम), सागर और भोपाल जैसे शहरों से चौगान गाँव तक सड़क मार्ग उपलब्ध है। गाडरवारा से किले की दूरी अपेक्षाकृत कम है और टैक्सी, निजी वाहन या स्थानीय परिवहन से आसानी से पहुँचा जा सकता है। पहाड़ी के आधार तक वाहन पहुँचते हैं, इसके बाद पैदल चढ़ाई करनी होती है।
रेल मार्ग (By Train)
निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन गाडरवारा रेलवे स्टेशन है, जो दिल्ली–चेन्नई मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है। यहाँ देश के कई प्रमुख शहरों से ट्रेनें उपलब्ध हैं। स्टेशन से टैक्सी या ऑटो द्वारा चौगान गाँव पहुँचा जा सकता है।
इसके अलावा नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन भी एक अच्छा विकल्प है, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा किले तक पहुँचना संभव है।
हवाई मार्ग (By Air)
निकटतम हवाई अड्डा राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भोपाल तथा जबलपुर का डुमना एयरपोर्ट हैं। जबलपुर एयरपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा गाडरवारा होते हुए चौगान किला पहुँचना अपेक्षाकृत सुविधाजनक रहता है।
ट्रैकिंग मार्ग
चौगान किले की यात्रा का सबसे रोमांचक हिस्सा इसकी पैदल चढ़ाई है। पहाड़ी रास्ता प्राकृतिक वनस्पतियों और चट्टानों से होकर गुजरता है। रास्ते में कई स्थानों से सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखलाओं का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। सामान्य शारीरिक क्षमता वाला व्यक्ति आराम से यह ट्रैक पूरा कर सकता है। सुबह के समय ट्रैकिंग करना सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि मौसम ठंडा रहता है और प्राकृतिक दृश्य अधिक आकर्षक दिखाई देते हैं।
चौगान/चौरागढ़ किला, नरसिंहपुर की तस्वीरें (Images of Chaugan for / Chauragarh Fort, Narsinghpur)





दीपेश्वर महादेव मंदिर, बरमान, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – चौगान का किला, नरसिंहपुर
1. चौगान का किला कहाँ स्थित है?
चौगान का किला मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के चौगान (चौरागढ़) गाँव के पास सतपुड़ा पर्वतमाला की एक पहाड़ी पर स्थित है। यह किला प्राकृतिक जंगलों से घिरा हुआ है और अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
2. चौगान का किला किसने बनवाया था?
इतिहासकारों के अनुसार चौगान का किला 16वीं शताब्दी में गोंड शासक राजा संग्राम शाह द्वारा बनवाया गया था। यह गोंड साम्राज्य की महत्वपूर्ण सैन्य चौकियों और दुर्गों में से एक माना जाता है।
3. क्या चौगान का किला और चौरागढ़ किला एक ही हैं?
स्थानीय स्तर पर चौगान का किला चौरागढ़ किला नाम से भी जाना जाता है। हालांकि भ्रम से बचने के लिए इसे नरसिंहपुर जिले के चौगान (गाडरवारा) स्थित चौरागढ़ किला के रूप में पहचानना उचित है, क्योंकि मध्य प्रदेश में “चौरागढ़” नाम से अन्य प्रसिद्ध स्थल भी हैं।
4. चौगान का किला घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
चौगान का किला घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और पहाड़ी पर ट्रैकिंग करना भी आसान होता है।
5. क्या चौगान का किला घूमने के लिए प्रवेश शुल्क देना पड़ता है?
वर्तमान में चौगान का किला देखने के लिए कोई प्रवेश शुल्क (Entry Fee) नहीं लिया जाता। पर्यटक यहाँ निःशुल्क भ्रमण कर सकते हैं।
6. चौगान के किले के अंदर क्या-क्या देखने को मिलता है?
किले के भीतर तीन प्राचीन प्रवेश द्वार, रेवाकुंड, नरसिंह मंदिर, रंगमहल, राजा प्रेम नारायण शाह का महल, रानीमहल, सीढ़ीदार कुएँ तथा प्राचीन किले की विशाल प्राचीरों के अवशेष देखने को मिलते हैं।
7. चौगान का किला किस लिए प्रसिद्ध है?
यह किला गोंडकालीन इतिहास, पहाड़ी दुर्ग निर्माण कला, प्राकृतिक सुंदरता, ट्रैकिंग और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह गोंड शासकों की सैन्य रणनीति और स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
8. चौगान का किला पहुँचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन कौन-सा है?
चौगान किले के सबसे निकट गाडरवारा रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन से भी सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
9. क्या चौगान का किला परिवार के साथ घूमने के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह स्थान परिवार, इतिहास प्रेमियों, प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए उपयुक्त है। हालांकि छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करते समय पहाड़ी चढ़ाई के कारण अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
10. चौगान का किला घूमने में कितना समय लगता है?
यदि आप पूरे किले का आराम से भ्रमण करना चाहते हैं, तो लगभग 2 से 3 घंटे का समय पर्याप्त रहता है। यदि आप ट्रैकिंग, फोटोग्राफी और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आधा दिन आराम से निकाल सकते हैं।
11. क्या चौगान किले में खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध है?
किले के ऊपर भोजन या पेयजल की नियमित सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसलिए पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने साथ पर्याप्त पानी, हल्का नाश्ता और आवश्यक सामान लेकर जाएँ।
12. चौगान का किला घूमते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
यात्रा के दौरान आरामदायक जूते पहनें, पर्याप्त पानी साथ रखें, ऐतिहासिक संरचनाओं को नुकसान न पहुँचाएँ, प्लास्टिक कचरा न फैलाएँ और सूर्यास्त से पहले वापस लौटने का प्रयास करें। मानसून में फिसलन वाले रास्तों पर विशेष सावधानी बरतें।


