श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता और कार्यसिद्धि देने वाला देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान की शुरुआत में उनका पूजन आवश्यक होता है।
मयूरेश स्तोत्र गणपति जी के दुर्लभ स्तोत्रों में से एक है, जो विशेष रूप से चिंता, रोग, बाधा, विपत्ति, और कार्य में असफलता को दूर करता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ शांति, समृद्धि, सफलता और स्वास्थ्य प्रदान करता है।
गणपति प्रार्थना
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा ।।
गणेश जी के बारह नाम
सुमुखश्च एकदंतश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥
मयूरेश स्तोत्र पाठ
ब्रह्मोवाच
पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा।
मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
परात्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदि स्थितम्।
गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया।
सर्वविघ्नहरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
नानादैत्यनिहन्तारं नानारूपाणि विभ्रतम्।
नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमाम्यहम्॥
इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टुतमहर्निशम्।
सदसद्व्यक्तमव्यक्तं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरूपधरं विभुम्।
सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम्।
भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
मुनिध्येयं मुनिनुतं मुनिकामप्रपूरकम्।
समष्टिव्यष्टिरूपं त्वां मयूरेशं नमाम्यहम्॥
सर्वाज्ञाननिहन्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम्।
सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
अनेककोटिब्रह्माण्डनायकं जगदीश्वरम्।
अनन्तविभवं विष्णुं मयूरेशं नमाम्यहम्॥
मयूरेश उवाच – स्तोत्र का फल
इदं ब्रह्मकरं स्तोत्रं सर्वपापप्रनाशनम्।
सर्वकामप्रदं नृणां सर्वोपद्रवनाशनम्॥
कारागृहगतानां च मोचनं दिनसप्तकात्।
आधिव्याधिहरं चैव भुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम्॥
मयूरेश स्तोत्र के लाभ (Benefits)
- बच्चों के रोग निवारण में अचूक।
- घर में शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
- कार्यों की रुकावटें दूर होती हैं।
- चिंता और भय से मुक्ति मिलती है।
- बुद्धि, विद्या और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
- बाधा, ग्रह दोष और कोर्ट कचहरी जैसे मामलों में सहायता करता है।
- कारागार से मुक्ति, रोग से राहत और मोक्ष तक प्रदान करता है।
मयूरेश स्तोत्र पाठ की सावधानियाँ (Precautions for reciting Mayuresh Stotra)
- गणपति पूजन में तुलसी का उपयोग न करें।
- दूर्वा गणेश जी को अति प्रिय है — अर्पित करें।
- अर्घ्य में निम्न 8 वस्तुएँ रखें:
दही, दूर्वा, कुश, पुष्प, अक्षत, कुमकुम, पीली सरसों, सुपारी - यदि सामग्री न हो तो केवल अक्षत से भी अर्घ्य दिया जा सकता है।
- पूजा में घी का दीपक प्रज्वलित करें।
जप/पाठ का समय (Chanting/Paath Timings)
- प्रत्येक बुधवार, विशेषतः शुक्ल पक्ष के बुधवार से आरंभ करें।
- सुबह सूर्योदय के बाद या शाम के समय पाठ करना श्रेष्ठ है।
- संकट काल में 7 दिन का नियमित पाठ अवश्य करें।


