मंगला गौरी स्तोत्र देवी पार्वती जी के मंगलमयी स्वरूप — मंगला गौरी — को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और मंगलकारी स्तोत्र है। यह स्तोत्र विशेष रूप से स्त्रियों के सौभाग्य, सुन्दर दांपत्य जीवन, शीघ्र विवाह, और संतान सुख के लिए फलदायक माना जाता है।
मंगलवार के दिन देवी मंगला गौरी की उपासना का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि जो कन्याएं और स्त्रियां श्रद्धा और नियमपूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करती हैं, उनके जीवन से सभी अमंगल दूर हो जाते हैं, मंगल दोष शांत होता है, और विवाह, संतान व गृहस्थ जीवन सुखमय बनता है।
इस स्तोत्र में देवी को मंगल की अधिष्ठात्री, दुःख हरने वाली, संतान सुख देने वाली, और सभी कर्मों को सफल बनाने वाली के रूप में स्तुतिपूर्वक पुकारा गया है। यह स्तोत्र श्रद्धा से पढ़ने या सुनने मात्र से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि का संचार करता है।
मंगला गौरी स्तोत्रं (Mangla Gauri Stotram)
ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके।
हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके॥
हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके।
शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके॥
मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले।
सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये॥
पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते।
पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्॥
मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले।
संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्॥
देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः।
प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे॥
तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्।
वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने॥
मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले।
॥ इति मंगला गौरी स्तोत्र सम्पूर्णं ॥
मंगला गौरी स्तोत्र — हिंदी अनुवाद (Mangala Gauri Stotra – Hindi Translation)
ॐ हे जगत् की माता! रक्षा करें, रक्षा करें।
हे देवी मंगला चण्डिका! विपत्तियों को हरने वाली, हर्ष और मंगल प्रदान करने वाली आप ही हैं।
जो आनंद और शुभता की उत्पत्ति करने में दक्ष हैं,
और जो सदा आनंद और शुभ फल प्रदान करती हैं,
हे चण्डिके! आप शुभ और मंगल की साकार स्वरूपा हैं।
हे मंगला देवी! आप ही सच्चे मंगल की अधिकारी हैं,
सभी प्रकार के मंगलों में श्रेष्ठ हैं।
हे देवी! आप सच्चे मंगल की दात्री हैं और सभी का कल्याण करने वाली हैं।
जो मंगलवार के दिन पूजनीय हैं,
जो भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करने वाली मंगलमयी देवी हैं।
जो राजा मनु के वंश में भी सदा पूजित होती रही हैं।
हे मंगला देवी! आप ही मंगल की अधिष्ठात्री देवी हैं,
आप मंगल स्वरूपा हैं, संसार की मंगलमयी आधार हैं,
और समस्त कर्मों के पार जाने में सहायक हैं।
जो भी व्यक्ति इस देवी के मंगल स्तोत्र को श्रद्धा और एकाग्रता से सुनता है,
और विशेष रूप से मंगलवार के दिन इसका पूजन करता है —
उसे शुभता और सुख की प्राप्ति होती है।
उसका जीवन मंगलमय हो जाता है,
और अमंगल उसके जीवन में स्थान नहीं पाते।
उसके पुत्र-पौत्रों की वृद्धि होती है,
और प्रतिदिन मंगल में वृद्धि होती है।
हे मंगला मंगले! मेरी रक्षा करें, मेरी रक्षा करें, मेरी रक्षा करें।
ॐ मंगला मंगले!
॥ इस प्रकार मंगला गौरी स्तोत्र सम्पूर्ण हुआ ॥
मंगला गौरी स्तोत्र के लाभ (Benefits of Mangala Gauri Stotra)
- विवाह में आ रही बाधा दूर होती है – अविवाहित कन्याओं के लिए यह स्तोत्र अत्यंत फलदायक माना गया है। इसे पढ़ने या सुनने से जल्दी और शुभ विवाह के योग बनते हैं।
- वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है – जिनका दांपत्य जीवन अशांत हो, उनके लिए यह स्तोत्र शांति और प्रेम का स्रोत बनता है।
- संतान प्राप्ति में सहायता – जिन महिलाओं को संतान की प्राप्ति में कठिनाई हो रही हो, उनके लिए यह स्तोत्र मंगलदायक सिद्ध होता है।
- सभी प्रकार के अमंगल और दोषों की शांति – विशेष रूप से मंगल दोष, कुल दोष, या विवाह संबंधी ग्रह बाधाओं की शांति के लिए यह स्तोत्र उपयोगी है।
- घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है – देवी मंगला गौरी की कृपा से घर का वातावरण सकारात्मक और उन्नतिपूर्ण होता है।
पाठ विधि (Path Vidhi)
- स्थान – किसी शुद्ध और शांत स्थान पर बैठें, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके।
- आसन – लाल या पीले वस्त्र पहनें तथा लाल कपड़े पर बैठें।
- मंगला गौरी की मूर्ति/चित्र – देवी का चित्र, दीपक, फूल, धूप आदि की व्यवस्था करें।
- संकल्प – मन में साफ़ उद्देश्य रखें कि किस हेतु से आप पाठ कर रहे हैं (जैसे विवाह, सुख, संतान)।
- पाठ करें – पूरे भाव व श्रद्धा के साथ मंगला गौरी स्तोत्र का पाठ करें।
- माला जप (वैकल्पिक) – पाठ के बाद देवी का बीज मंत्र जप करें: “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं मङ्गलायै नमः” — (108 बार करें तो विशेष फल मिलता है)
- प्रसाद अर्पण – नारियल, मिश्री, फूल, चना, या कोई मिठाई अर्पित करें।
- आरती – अंत में देवी की आरती करें और अपने परिवार के मंगल की कामना करें।
पाठ / जप का उपयुक्त समय (Best Time to Recite)
- दिन – मंगलवार को यह स्तोत्र पढ़ना या सुनना विशेष रूप से फलदायक होता है।
- समय –
- सुबह 6 बजे से 8 बजे के बीच
- या शाम को सूर्यास्त के बाद 7 बजे के बाद
- श्रावण मास और नवरात्रि में इसका पाठ विशेष फल देता है।
- विवाह योग्य कन्याएं सावन महीने में मंगलवार के व्रत के साथ इसका पाठ करें तो शीघ्र विवाह होता है।


























































