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बुध स्तोत्रम् (Buddh Stotra)

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बुध स्तोत्र क्या है? (What is Budh Stotra?)

सनातन धर्म में बुध ग्रह को बुद्धि, ज्ञान, वाणी, तर्कशक्ति, गणित, लेखन, शिक्षा, व्यापार और संचार का कारक माना गया है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में होता है, तो उसे निर्णय लेने में कठिनाई, पढ़ाई में बाधा, व्यापार में नुकसान, वाणी दोष और मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र – भगवान भगवान शिव मंत्र (Shri Shivaya Namastubhyam Mantra – A Sacred Mantra of Lord Shiva)

ऐसी स्थिति में “बुध स्तोत्र” का पाठ अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह स्तोत्र भगवान बुध की महिमा का वर्णन करता है और उनकी कृपा प्राप्त करने का सरल एवं प्रभावशाली माध्यम है। नियमित श्रद्धापूर्वक पाठ करने से बुद्धि का विकास होता है, वाणी में मधुरता आती है तथा बुध ग्रह से संबंधित दोष शांत होते हैं।

भगवान बुध कौन हैं? (Who is Lord Budh?)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध देव चंद्रमा (सोम) और तारा के पुत्र हैं। उन्हें नवग्रहों में ज्ञान, विवेक, संचार, शिक्षा और व्यापार का अधिपति माना जाता है।

भगवान बुध के प्रमुख स्वरूप

वैदिक मंत्र – ॐ बुधाय नमः

वर्ण – हरा या पीत वर्ण

वाहन – सिंह

धातु – कांसा

रत्न – पन्ना (Emerald)

वार – बुधवार

दिशा – उत्तर

बीज मंत्र – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

मंदार माला कलितालकायै मंत्र – शिव-शक्ति मंत्र (Mandar Mala Kalitalakayai Mantra – Shiva-Shakti Mantra)

बुध स्तोत्र (Buddh Stotra)

पीताम्बर: पीतवपु किरीटी, चतुर्भुजो देवदु:खापहर्ता।
धर्मस्य धृक सोमसुत: सदा मे, सिंहाधिरुढ़ो वरदो बुधश्च।।

प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम्।।

सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित:।
सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम्।।

उत्पातरूपी जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति:।
सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीडां हरतु मे बुधम्।।

शिरीषपुष्पसंकाशं कपिलीशो युवा पुन:।
सोमपुत्रो बुधश्चैव सदा शान्तिं प्रयच्छतु।।

श्याम: शिरालश्च कलाविधिज्ञ: कौतूहली कोमलवाग्विलासी।
रजोधिको मध्यमरूपधृक स्यादाताम्रनेत्रो द्विजराजपुत्र:।।

अहो चन्द्रासुत श्रीमन् मागधर्मासमुद्भव:।
अत्रिगोत्रश्चतुर्बाहु: खड्गखेटकधारक:।।

गदाधरो नृसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित:।
केतकीद्रुमपत्राभ: इन्द्रविष्णुप्रपूजित:।।

ज्ञेयो बुध: पण्डितश्च रोहिणेयश्च सोमज:।
कुमारो राजपुत्रश्च शैशवे शशिनन्दन:।।

गुरुपुत्रश्च तारेयो विबुधो बोधनस्तथा।
सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद:।।

एतानि बुधनामानि प्रात: काले पठेन्नर:।
बुद्धिर्विवृद्धितां याति बुधपीड़ा न जायते।।

।। इति बुध स्तोत्र संपूर्णम्।।

बुध स्तोत्र – हिंदी अनुवाद सहित

पीताम्बर: पीतवपु किरीटी, चतुर्भुजो देवदु:खापहर्ता।
धर्मस्य धृक सोमसुत: सदा मे, सिंहाधिरुढ़ो वरदो बुधश्च।।
पीले वस्त्रधारी, पीले रंग के शरीर वाले, मुकुटधारी, चार भुजाओं वाले भगवान बुध सभी दुखों को दूर करने वाले हैं।
वे धर्म के धारक, चंद्रमा के पुत्र हैं, सदा मेरे लिए कल्याणकारी हों। वे सिंह पर विराजमान और वरदान देने वाले हैं।

प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम्।।
प्रियंगु और सोने के समान पीत वर्ण वाले, अनुपम रूप वाले बुधदेव को मैं नमस्कार करता हूँ।
वे अत्यंत सौम्य हैं और सौम्य गुणों से युक्त हैं। वे चंद्रमा के पुत्र हैं।

सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित:।
सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम्।।
बुध चंद्रमा के पुत्र हैं, अत्यंत शांत स्वभाव वाले और सद्गुणों से युक्त हैं।
वे सदा शांति और कल्याण देने वाले हैं – ऐसे शशिनंदन को मैं प्रणाम करता हूँ।

उत्पातरूपी जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति:।
सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीडां हरतु मे बुधम्।।
यह चंद्रपुत्र बुध देव, जो संपूर्ण सृष्टि में तेजस्वी हैं और विद्वान हैं,
सूर्य को प्रिय हैं — वे मेरी समस्त पीड़ाओं को दूर करें।

शिरीषपुष्पसंकाशं कपिलीशो युवा पुन:।
सोमपुत्रो बुधश्चैव सदा शान्तिं प्रयच्छतु।।
जो शिरीष पुष्प के समान कान्तिवान हैं, गंगा के निकटवर्ती (कपिलीश्वर), और यौवन से परिपूर्ण हैं,
चंद्रमा के पुत्र बुधदेव सदा मुझे शांति प्रदान करें।

श्याम: शिरालश्च कलाविधिज्ञ: कौतूहली कोमलवाग्विलासी।
रजोधिको मध्यमरूपधृक स्यादाताम्रनेत्रो द्विजराजपुत्र:।।
वे श्याम वर्ण के हैं, बालों से युक्त हैं, कलाओं में निपुण हैं, जिज्ञासु हैं,
कोमल वाणी के स्वामी हैं, राजसी प्रवृत्ति के हैं, मध्यम आकृति वाले हैं, ताम्र नेत्र वाले हैं और ब्राह्मणश्रेष्ठ (चंद्रमा) के पुत्र हैं।

अहो चन्द्रासुत श्रीमन् मागधर्मासमुद्भव:।
अत्रिगोत्रश्चतुर्बाहु: खड्गखेटकधारक:।।
हे! चंद्रमा के पुत्र, श्रीमान् बुधदेव, जो मगध धर्म परंपरा से उत्पन्न हुए हैं,
अत्रि ऋषि के गोत्र से हैं, चार भुजाओं वाले हैं और खड्ग तथा ढाल धारण किए हुए हैं।

गदाधरो नृसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित:।
केतकीद्रुमपत्राभ: इन्द्रविष्णुप्रपूजित:।।
वे गदा धारण करने वाले हैं, नृसिंह देव के आसन पर विराजमान हैं, उनके नाभि में स्वर्णमणि है,
वे केतकी के पत्तों के समान कान्तिवान हैं और इन्द्र तथा विष्णु द्वारा पूजित हैं।

ज्ञेयो बुध: पण्डितश्च रोहिणेयश्च सोमज:।
कुमारो राजपुत्रश्च शैशवे शशिनन्दन:।।
बुध को पंडित, रोहिणी के पुत्र, चंद्रमा का पुत्र, कुमार, राजकुमार और बचपन में ही ज्ञान से युक्त कहा गया है।

गुरुपुत्रश्च तारेयो विबुधो बोधनस्तथा।
सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद:।।
वे बृहस्पति (गुरु) के शिष्य हैं, तारा के पुत्र हैं, देवताओं के समान बुद्धिमान हैं, ज्ञान देने वाले हैं,
सौम्य स्वभाव वाले हैं, सौम्य गुणों से युक्त हैं और रत्न दान का फल देने वाले हैं।

एतानि बुधनामानि प्रात: काले पठेन्नर:।
बुद्धिर्विवृद्धितां याति बुधपीड़ा न जायते।।
जो व्यक्ति प्रातःकाल इन बुधदेव के नामों का पाठ करता है,
उसकी बुद्धि में वृद्धि होती है और बुध ग्रह से संबंधित कोई पीड़ा नहीं होती।

।। इति बुध स्तोत्र संपूर्णम्।।

ॐ पद्मावत्यै वषट् – माता पद्मावती मंत्र: सुख-समृद्धि और संकट मुक्ति का दिव्य जैन मंत्र (Om Padmavatyei Vashat – Mata Padmavati Mantra: Sukh-Samriddhi aur Sankat Mukti ka Divya Jain Mantra)

बुध स्तोत्र का धार्मिक महत्व (Religious Significance of Budh Stotra)

बुध स्तोत्र केवल ग्रह शांति का साधन नहीं है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक विकास का भी माध्यम माना जाता है। इस स्तोत्र में बुध देव के स्वरूप, गुण, तेज, ज्ञान और कृपा का वर्णन मिलता है।

शास्त्रों के अनुसार बुध ग्रह मनुष्य की बौद्धिक क्षमता, विश्लेषण शक्ति और संवाद कौशल को प्रभावित करता है। इसलिए विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, पत्रकार, व्यापारी, वकील तथा संचार क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

बुध स्तोत्र के लाभ (Benefits of Budh Stotra)

1. बुद्धि और स्मरण शक्ति में वृद्धि

नियमित पाठ करने से मानसिक क्षमता और एकाग्रता बढ़ती है।

2. शिक्षा में सफलता

विद्यार्थियों के लिए यह स्तोत्र विशेष लाभदायक माना जाता है। परीक्षा की तैयारी में भी यह सहायक माना जाता है।

3. वाणी दोष दूर करता है

बुध ग्रह वाणी का कारक है। इसके प्रभाव से बोलने की क्षमता और संचार कौशल में सुधार आता है।

4. व्यापार में लाभ

व्यापार, मार्केटिंग, अकाउंटिंग और संचार आधारित कार्यों में सफलता प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

5. ग्रह दोषों की शांति

कुंडली में कमजोर बुध, बुध महादशा, अंतरदशा या बुध से संबंधित दोषों में राहत मिलती है।

6. मानसिक संतुलन

यह स्तोत्र मन को शांत और सकारात्मक बनाता है।

7. निर्णय क्षमता मजबूत करता है

व्यक्ति में तार्किक सोच और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

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किन लोगों को बुध स्तोत्र का पाठ करना चाहिए? (Who Should Recite Budh Stotra?)

निम्न परिस्थितियों में बुध स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है—

  • जिनकी कुंडली में बुध नीच राशि में हो।
  • बुध ग्रह राहु या केतु से पीड़ित हो।
  • शिक्षा में बार-बार बाधा आती हो।
  • वाणी संबंधी समस्याएं हों।
  • व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा हो।
  • मानसिक भ्रम और निर्णय लेने में कठिनाई हो।
  • बुध महादशा या अंतरदशा चल रही हो।

बुध स्तोत्र पाठ करने की सही विधि (How to Recite Budh Stotra?)

सुबह की तैयारी

  • ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करें।
  • स्वच्छ या हरे रंग के वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ करें।
  • भगवान गणेश और बुध देव का स्मरण करें।

पूजा सामग्री

  • हरे मूंग
  • दुर्वा घास
  • मिश्री
  • हरे फल
  • धूप और दीपक
  • पान का पत्ता

पाठ प्रक्रिया

  1. भगवान बुध का ध्यान करें।
  2. दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
  3. हरे मूंग और दुर्वा अर्पित करें।
  4. श्रद्धा और एकाग्रता के साथ बुध स्तोत्र का पाठ करें।
  5. अंत में “ॐ बुधाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
  6. भगवान से बुद्धि, ज्ञान और सफलता की प्रार्थना करें।

बुध स्तोत्र पाठ का सबसे शुभ समय (Best Time to Recite Budh Stotra)

सर्वश्रेष्ठ दिन

  • बुधवार

सर्वश्रेष्ठ समय

  • प्रातःकाल
  • सूर्योदय के बाद
  • बुध होरा

विशेष अवसर

  • बुध महादशा
  • बुध अंतरदशा
  • बुध ग्रह पीड़ा
  • परीक्षा से पहले
  • नए व्यापार की शुरुआत

ज्योतिष में बुध ग्रह का महत्व (Importance of Mercury in Astrology)

वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को “राजकुमार ग्रह” कहा जाता है। यह व्यक्ति की बुद्धि, तर्क, गणना, विश्लेषण क्षमता, भाषण कला, व्यवसायिक कौशल और संचार शक्ति को नियंत्रित करता है।

यदि बुध मजबूत हो तो व्यक्ति—

  • बुद्धिमान बनता है।
  • अच्छा वक्ता होता है।
  • व्यापार में सफलता प्राप्त करता है।
  • लेखन और शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है।
  • सामाजिक रूप से प्रभावशाली बनता है।

बुध ग्रह को प्रसन्न करने के अन्य उपाय (Remedies to Please Mercury Planet)

  • बुधवार का व्रत रखें।
  • गाय को हरा चारा खिलाएं।
  • हरे मूंग का दान करें।
  • दुर्वा गणेश जी को अर्पित करें।
  • पन्ना रत्न धारण करें (ज्योतिषीय सलाह के बाद)।
  • बुध बीज मंत्र का जप करें।
  • गरीब विद्यार्थियों को पुस्तकें दान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या बुध स्तोत्र का पाठ रोज किया जा सकता है?

हाँ, इसका पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है। हालांकि बुधवार को इसका विशेष महत्व माना गया है।

बुध स्तोत्र कितनी बार पढ़ना चाहिए?

सामान्यतः एक बार पाठ पर्याप्त है, लेकिन विशेष साधना में 11 या 21 बार भी किया जा सकता है।

क्या विद्यार्थी बुध स्तोत्र पढ़ सकते हैं?

हाँ, विद्यार्थियों के लिए यह स्तोत्र विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

क्या बुध स्तोत्र ग्रह दोष दूर करता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह बुध ग्रह की अशुभता को कम करने और शुभ प्रभाव बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

बुध स्तोत्र के साथ कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

“ॐ बुधाय नमः” अथवा “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का जप किया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

बुध स्तोत्र भगवान बुध की कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावशाली स्तोत्र है। यह केवल ग्रह शांति का उपाय नहीं बल्कि बुद्धि, ज्ञान, वाणी, व्यापारिक सफलता और मानसिक संतुलन प्राप्त करने का आध्यात्मिक साधन भी माना जाता है। जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमितता से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन में सकारात्मकता, विवेक और सफलता का विकास होने की मान्यता है। बुधवार के दिन विशेष रूप से इसका पाठ करने से बुध ग्रह की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में ज्ञान, संवाद कौशल तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

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