हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है। वे जगत के रक्षक हैं और सभी जीवों के कल्याण हेतु कार्य करते हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले मंगलाचरण करना अति आवश्यक माना जाता है, जिससे कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सके। मंगलाचरण के लिए ‘ॐ मंगलम भगवान विष्णु’ मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
मंत्र:
मंगलम भगवान विष्णु, मंगलम गरुड़ ध्वज:।
मंगलम पुण्डरीकाक्ष, मंगलाय तनो हरि।।
मंत्र का अर्थ (Meaning of Mantra):
भगवान विष्णु स्वयं मंगलमय हैं, जिनके ध्वज पर गरुड़ विराजमान हैं, वे कल्याणकारी हों।
कमलनयन भगवान का मंगल हो, और वे समस्त जगत का कल्याण करें।
मंत्र के लाभ (Benefits of Mantra):
- सभी बाधाओं का नाश – इस मंत्र के नियमित जाप से जीवन में आने वाली समस्त विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं।
- विवाह में आ रही देरी समाप्त होती है – जो लोग विवाह में विलंब की समस्या से ग्रसित हैं, उनके लिए इस मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी माना गया है।
- आर्थिक उन्नति – धन संबंधी समस्याओं को दूर करने में यह मंत्र विशेष फलदायी होता है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति – यदि इस मंत्र का जाप ब्रह्म मुहूर्त में किया जाए, तो इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
- शुभ कार्यों की सफलता – किसी भी धार्मिक या शुभ कार्य की शुरुआत इस मंत्र के उच्चारण से करने पर कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।
कब करें इस मंत्र का जाप?(When to chant this mantra?)
- ब्रह्म मुहूर्त में – सुबह 4 से 6 बजे के बीच इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पूजा-पाठ से पहले – घर में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा से पहले इसका उच्चारण किया जाता है।
- विवाह, गृह प्रवेश व अन्य शुभ कार्यों में – जब भी कोई मंगल कार्य हो, तो इस मंत्र का जप अवश्य करें।
- नए कार्य की शुरुआत में – कोई नया व्यापार, नौकरी, यात्रा या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले इस मंत्र का जाप करना शुभ होता है।
भगवान विष्णु के इस मंगलमय मंत्र का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी कार्य सफल होते हैं।


