ॐ वृषभानुजाय विद्महे, कृष्णप्रियाय धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात् ।।
यह मंत्र प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक है। इस मंत्र का जाप करने से जीवन में प्रेम, सौहार्द और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
राधा गायत्री मंत्र का अर्थ (Meaning of Radha Gayatri Mantra)
- “वृषभानुजायै विद्महे” → हम वृषभानु नंदिनी (राजा वृषभानु की पुत्री) राधा को जानें।
- “कृष्णप्रियायै धीमहि” → जो भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय हैं, उन पर हम ध्यान करें।
- “तन्नो राधा प्रचोदयात्” → वे श्री राधा हमें प्रेम और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करें
राधा गायत्री मंत्र का महत्व (Importance of Radha Gayatri Mantra)
✔ प्रेम और भक्ति में वृद्धि होती है।
✔ भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।
✔ मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।
✔ सकारात्मकता और दैवीय आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
✔ जीवन में प्रेमपूर्ण संबंध और सौहार्द बना रहता है।
यह मंत्र भगवान कृष्ण और राधा रानी की दिव्य उपस्थिति को आह्वान करने के लिए जपा जाता है। इसे जपने से साधक के जीवन में प्रेम, शांति और भक्ति का संचार होता है।
राधा गायत्री मंत्र जाप की विधि (Method of Chanting Radha Gayatri Mantra)
- प्रतिदिन स्नान के बाद मंत्र का जाप करें।
- किसी शांत और पवित्र स्थान पर बैठकर श्रीकृष्ण और राधा रानी का ध्यान करें।
- कम से कम 108 बार जप करना शुभ माना जाता है।
- जाप करते समय मन को एकाग्र करें और प्रेम व भक्ति की भावना रखें।
- यदि संभव हो तो राधा-कृष्ण के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।


