अन्नपूर्णा देवी को अन्न और पोषण की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। यह मंत्र देवी अन्नपूर्णा का आह्वान करने और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए जपा जाता है। इस मंत्र के जाप से जीवन में समृद्धि, अन्नपूर्णता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अन्नपूर्णा गायत्री मन्त्र (Annapurna Gayatri Mantra)
ॐ भगवत्यै च विद्महे, महेश्वर्यै च धीमहि, तन्नोन्नपूर्णा प्रचोदयात् ।।
गायत्री मंत्र जाप करने की विधि (Method of chanting Gayatri Mantra):
- कुश या चटाई के आसन पर बैठकर मंत्र का जाप करें।
- तुलसी या चंदन की माला का प्रयोग करें।
- ब्रह्म मुहूर्त में अर्थात् सुबह पूर्व दिशा की ओर मुख करके मंत्र का जाप करें।
- संध्या के समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करके जाप करें।
- इस मंत्र का मानसिक जाप किसी भी समय किया जा सकता है।
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