माँ नर्मदा की आरती उनके शुद्ध और पावन जल, उद्धारकारी स्वरूप और अक्षय पुण्यदायिनी शक्ति को समर्पित है।
विद्यां ददाति विनयं (Vidya Dadati Vinayam)
माँ नर्मदा की महिमा (Glory of Mother Narmada)
माँ नर्मदा का अवतरण भगवान शिव की कृपा से हुआ था। चारों वेदों में नर्मदा नदी की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। माँ नर्मदा आनंद, ज्ञान, सिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाली शाश्वत सुख और शांति की देवी हैं। देव सरिता माँ नर्मदा को स्नान और पूजन करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।
संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak)
नर्मदा जी की आरती (Aarti of Narmada ji)
ॐ जय जगदानन्दी,
मैया जय आनन्द कन्दी ।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा शिव,
हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
॥ ॐ जय जय जगदानन्दी ॥
देवी नारद शारद तुम वरदायक,
अभिनव पद चण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत,
सुर नर मुनि शारद पदवनती॥
॥ ॐ जय जय जगदानन्दी ॥
देवी धूमक वाहन,
राजत वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत
झननना झननना रमती राजंती॥
॥ ॐ जय जय जगदानन्दी ॥
देवी बाजत ताल मृदंगा
सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान
तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥
॥ ॐ जय जय जगदानन्दी ॥
देवी सकल भुवन पर आप विराजत,
निशदिन आनंदी।
गावत गंगा शंकर,सेवत रेवा शंकर,
तुम भव मेटन्ती॥
॥ ॐ जय जय जगदानन्दी ॥
मैया जी को कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती।
अमर कंठ विराजत,
घाटन घाट कोटी रतन ज्योति॥
॥ ॐ जय जय जगदानन्दी ॥
मैया जी की आरती निशदिन
पढ़ि पढ़ि जो गावें।
भजत शिवानन्द स्वामी
मन वांछित फल पावे॥
॥ ॐ जय जय जगदानन्दी ॥
ॐ जय जगदानन्दी,
मैया जय आनन्द कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा शिव,
हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
॥ ॐ जय जय जगदानन्दी ॥
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