ॐ ह्रीं योगिनी योगिनी योगेश्वरी योग भयंकरी
सकल स्थावर जंगमस्य मुख हृदयं मम वशं
आकर्षय आकर्षय नमः।।
स्वयंवर पार्वती मंत्र को विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और इच्छित वर की प्राप्ति के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। यह माना जाता है कि इस मंत्र को देवी पार्वती ने ऋषि दुर्वासा से प्राप्त किया था और उन्होंने इस मंत्र का जाप करके भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था।
यह मंत्र इस प्रकार है:
ॐ ह्रीं योगिनी योगिनी योगेश्वरी योग भयंकरी सकल स्थावर जंगमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः।।
मंत्र का अर्थ: (Meaning of the mantra:)
- ॐ ह्रीं: यह परमात्मा और शक्ति की स्तुति है।
- योगिनी योगिनी योगेश्वरी: योग की देवी, योग का मार्गदर्शन करने वाली और सर्वश्रेष्ठ योगिनी की स्तुति।
- योग भयंकरी: योग के रास्ते की बाधाओं और भय को नष्ट करने वाली।
- सकल स्थावर जंगमस्य मुख हृदयं मम वशं आकर्षय आकर्षय नमः: इस मंत्र के द्वारा प्रार्थना की जाती है कि सृष्टि में चल-अचल सभी का हृदय मेरे अनुकूल हो जाए और मेरी इच्छाओं की पूर्ति हो।
इस मंत्र का जाप कैसे करें: (How to chant this mantra:)
- किसी पवित्र और शांत स्थान पर बैठकर, प्रतिदिन सुबह या शाम के समय इस मंत्र का जाप किया जाता है।
- कम से कम 108 बार (एक माला) प्रतिदिन जप करना शुभ माना जाता है।
- भगवान शिव और देवी पार्वती की उपासना के साथ इस मंत्र का जाप करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
यह मंत्र देवी पार्वती की तपस्या और संकल्प का प्रतीक है, जिससे उन्होंने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया। इस मंत्र का नियमित और शुद्ध मन से जाप करने से विवाह संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।


