“यदा यदा हि धर्मस्य” श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के चतुर्थ अध्याय (ज्ञान योग) का सातवां और आठवां श्लोक है। अध्याय का नाम: गणपति अथर्वशीर्षम (Ganapathy Atharvaseersham) तुलसी जी की आरती (Tulsi ji ki aarti) श्लोक का संदर्भ: भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि जब-जब संसार में धर्म का ह्रास होता है और अधर्म का विस्तार होता है, Read More
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Hindi Mantra and Bhajan
- अक्षरं परमं ब्रह्म मंत्र (Aksharam Paramam Brahma Mantra) – भगवान विष्णु के परम ब्रह्म स्वरूप का दिव्य मंत्र
- हनुमान प्रणाम मंत्र (Hanuman Pranam Mantra): पूजा की शुरुआत में बोले जाने वाला पवित्र मंत्र
- पूजा से पहले बोला जाने वाला शुक्लाम्बरधरं विष्णुं मंत्र (Shuklambaradharam Vishnum Mantra) – अर्थ, महत्व और लाभ
- सोने से पहले पढ़ें यह शिव क्षमा प्रार्थना मंत्र (Shiva Forgiveness Prayer Mantra Before Sleep)
- जनकसुता जग जननि जानकी चौपाई (Janaksuta Jag Janani Janaki Chaupai) – सद्बुद्धि और एकाग्रता की प्रार्थना
- गणपति जी ध्यान मंत्र (Ganpati Ji Dhyan Mantra): अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ की संपूर्ण जानकारी
- भगवान श्रीराम को प्रणाम करने का मंत्र (Shri Ram Pranam Mantra)
- अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम मंत्र (Anyatha Sharanam Nasti Tvameva Sharanam Mama Mantra) – अर्थ, महत्व, लाभ एवं जप विधि
- मंगला गौरी स्तुति (Mangla Gauri Stuti) – माँ मंगला गौरी की कृपा प्राप्त करने वाली दिव्य स्तुति
- ॥ श्री वेंकटेश सुप्रभातम् ॥ – भगवान श्री वेंकटेश्वर को जगाने वाला दिव्य प्रभात स्तोत्र (Shri Venkatesha Suprabhatam – The Divine Morning Hymn to Awaken Lord Venkateshwara)
