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नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे – आरएसएस प्रार्थना (Namaste Sada Vatsale Matruṛbhume – RSS Prarthna)

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नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमेत्वया हिन्दुभूमे सुखवं वर्धितोऽहम्।महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थेपतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥१॥ प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूताइमे सादरं त्वां नमामो वयम्त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम्सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्णमार्गम्स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्॥२॥ समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम्परं साधनं नाम वीरव्रतम्तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठाहृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्समर्था भवत्वाशिषा Read More

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उज्ज्वल वेंकट नाथ स्तोत्रं (Ujjwala Venkata Natha Stotram)

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“उज्ज्वल वेंकट नाथ स्तोत्रं” एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान वेंकटेश्वर (श्री वेंकटनाथ, अर्थात तिरुपति बालाजी) को समर्पित है। यह स्तोत्र उनकी महिमा, सौंदर्य, शक्ति और कृपा का गुणगान करता है। इस स्तोत्र का उद्देश्य है: उज्ज्वल वेंकट नाथ स्तोत्र | Ujjwala Venkata Natha Stotram रङ्गे तुङ्गे कवेराचलजकनकनद्यन्तरङ्गे भुजङ्गे,शेषे शेषे विचिन्वन् जगदवननयं भात्यशेषेऽपि दोषे ।निद्रामुद्रां Read More

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इन्द्राक्षी स्तोत्र (Indrakshi Stotra)

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इन्द्राक्षी स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य स्तोत्र है जो देवी इंद्राक्षी की स्तुति में रचा गया है। यह स्तोत्र विशेष रूप से दु:ख, रोग, भय, बाधाओं और संकटों से मुक्ति के लिए पढ़ा जाता है। इसे स्वयं देवराज इन्द्र ने भगवान शिव से प्राप्त कर जगत की भलाई के लिए प्रचारित किया था। इंद्राक्षी Read More

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इन्द्रकृत श्रीकृष्ण स्तोत्र (Indra krut ShriKrishna Stotra)

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यह स्तवराज (स्तुति) भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान करने वाला एक दिव्य स्तोत्र है, जिसे इन्द्रदेव ने उनकी स्तुति में कहा था। स्तवराज का संदर्भ और पौराणिक कथा इस स्तोत्र का संबंध एक प्रसिद्ध घटना से जुड़ा है, जब इन्द्र ने श्रीकृष्ण का अपमान किया और गोवर्धन पर्वत की पूजा का विरोध किया। इस Read More

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इंद्रकृत श्रीराम स्तोत्र (Indrakrit Shri Ram Stotra)

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“इन्द्रकृत श्रीराम स्तोत्र” श्रीमदध्यात्मरामायण के युद्धकाण्ड के तेरहवें सर्ग में वर्णित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। इसे स्वर्ग के राजा इन्द्र ने भगवान श्रीराम की स्तुति में रचा था। यह स्तोत्र भगवान राम की महिमा का वर्णन करता है और उनके दिव्य स्वरूप, शक्तियों, गुणों और करुणा का गुणगान करता है। इन्द्र ने यह स्तोत्र Read More

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आरूढा सरस्वती स्तोत्र (Arudha Saraswati Stotra)

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अरूढ़ा सरस्वती स्तोत्र माँ सरस्वती की एक स्तुति है, जिसमें उन्हें विशेष रूप से उनकी दिव्य सवारी (अरूढ़ा – अर्थात सवारी किए हुए) के रूप में वर्णित किया गया है। यह स्तोत्र भक्तों द्वारा ज्ञान, विद्या, और वाणी में सिद्धि प्राप्त करने के लिए पाठ किया जाता है। अरूढ़ा सरस्वती स्तोत्र का महत्त्व (Importance of Read More

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आनंद लहरी स्तोत्र (Ananda Lahari Stotram)

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“आनंदलहरी” भगवती भुवनेश्वरी (पार्वती) की स्तुति में रचित एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें 103 श्लोकों का संग्रह है। इसे पारंपरिक रूप से आद्य शंकराचार्य की रचना माना जाता है, हालांकि कुछ विद्वानों का मत है कि यह किसी बाद के शंकराचार्य द्वारा रचित हो सकता है। बावजूद इसके, जनसाधारण में यह अब भी आद्य Read More

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अहल्याक्रुता श्रीराम स्तोत्रं (Ahalya Kruta Sri Rama Stotram)

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अहल्या कृत श्रीराम स्तोत्रम् एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है, जो महर्षि गौतम की पत्नी अहल्या द्वारा भगवान श्रीराम की स्तुति में रचा गया है। यह स्तोत्र “अध्यात्म रामायण” के बालकांड के पंचम सर्ग में मिलता है। पौराणिक संदर्भ (Mythological references): स्तोत्र की विशेषताएँ (Features of the Stotra): स्तोत्र के लाभ (Benefits of Stotra): Read More

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अष्टलक्ष्मी स्तोत्र (Ashtalakshmi Stotram)

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अष्टलक्ष्मी स्तोत्र देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूपों की स्तुति करने वाला एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र इन आठ स्वरूपों की महिमा का वर्णन करता है और इनसे सुख, समृद्धि, धन, विद्या, ऐश्वर्य और सौभाग्य की प्राप्ति का आशीर्वाद माँगता है। अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का महत्व (Importance of Ashtalakshmi Stotra): अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम् : आदिलक्ष्मिसुमनस वन्दित Read More

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अश्वत्थ स्तोत्रम् (Ashvattha Stotram)

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अश्वत्थ स्तोत्रम् एक धार्मिक स्तोत्र है जो पीपल के पेड़ (अश्वत्थ) की महिमा का वर्णन करता है। हिंदू धर्म में अश्वत्थ (पीपल) को अत्यंत पवित्र और दिव्य माना जाता है। इसे भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा का स्वरूप कहा गया है। यह स्तोत्र पीपल के वृक्ष की पूजा के लाभों और उसके आध्यात्मिक महत्व को Read More