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प्रह्लादकृत नृसिंह स्तोत्रम् (Prahladkrit Narsimha Stotra)

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प्रहलादकृत नृसिंह स्तोत्र श्रीहरि विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना भक्त प्रह्लाद द्वारा स्वयं भगवान नृसिंहदेव की स्तुति करते समय की गई थी। यह स्तोत्र श्रीमद्भागवतम् के सातवें स्कंध में वर्णित है और कुल 48 श्लोकों में संपूर्ण है। जब हिरण्यकशिपु जैसे अत्याचारी असुर का वध कर भगवान Read More

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प्रत्यंगिरा महाविधा स्तोत्र (Pratyangira Mahavidya Stotra)

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किसी भी शत्रु की प्रबलतम तांत्रिक क्रियाओं को वापिस लौटने वाली एवं रक्षा करने वाली ये महा दिव्यशक्ति है। इस तंत्र का प्रयोग शत्रु को नाश करने के लिए, शत्रुओं के किये-करायों को नाश करने के लिए किया जाता है। कोई भी सिद्ध तन्त्र क्रियाओं को जानने वाला तांत्रिक इस विद्या का प्रयोग कर सकता Read More

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प्रग्य्ना विवर्धना कार्तिकेय (Pragnya Vivardhana Karthikeya Stotram)

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“प्रज्ञा विवर्धन कार्तिकेय स्तोत्र” एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद, कुमारस्वामी) को समर्पित है। यह स्तोत्र रुद्रयामल तंत्र से लिया गया है और मुख्य रूप से बुद्धि, वाक्पटुता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पाठ किया जाता है। इस स्तोत्र में भगवान कार्तिकेय के 28 पवित्र नामों का वर्णन किया गया है, जो उनके Read More

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पित्र देव स्तोत्रं (Pitra Dev Stotram)

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पितृ देव स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से युक्त स्तोत्र है, जो हमारे पूर्वजों (पितरों) की स्तुति, सम्मान और तृप्ति के लिए विशेष रूप से गाया या पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र मार्कण्डेय पुराण से लिया गया है, जिसमें रुचि मुनि द्वारा ध्यान और तप के माध्यम से पितरों को प्रसन्न करने के लिए Read More

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पितृ दोष स्तोत्र (Pitra Stotra)

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“पितृ स्तोत्र” एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है, जो पितरों की स्तुति, स्मरण और तृप्ति के लिए रचा गया है। यह स्तोत्र उन दिव्य आत्माओं के सम्मान में गाया जाता है जिन्होंने इस धरती पर जन्म लिया और फिर शरीर त्याग कर पितृलोक को प्राप्त हुए। श्राद्ध, तर्पण और पितृ पक्ष जैसे अवसरों पर Read More

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पशुपतास्त्रेय स्तोत्र (Pashuptastrey Stotra)

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शनि स्वयं फल नहीं देते, वे केवल कर्मों का फल देते हैं। यदि कुंडली में शनि प्रतिकूल है, तो शिव की उपासना विशेष रूप से लाभकारी होती है। यह स्तोत्र अग्नि पुराण के 322वें अध्याय से लिया गया है और अत्यंत प्रभावशाली व शीघ्र फलदायी माना गया है। यह प्रयोग शनि दोष, विवाह में देरी, Read More

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परा पूजा स्तोत्रम् (Para Puja Stotra)

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परा पूजा स्तोत्र कथिततः श्री शंकराचार्य द्वारा रचित है और इसे “निर्गुण मानस पूजा” या “ब्रह्म-वित्तमय पूजा” कहा जाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे हम परमात्मा की पूजा को बाह्य सामग्री से परे, दृष्टिबोध और कर्मभेद से मुक्त होकर करें — जहाँ हमारा मन, प्राणी और शरीर ईश्वर की पूजा का माध्यम बन Read More

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परमेश्वर स्तोत्रम् (Parmeshwar Stotra)

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“परमेश्वर स्तोत्र” एक आराधनात्मक स्तुति है, जिसमें “जगदीश, सुधीश, भवेश…” आरंभिक मंत्र है। यह ईश्वर को सर्वोच्च, पवित्र और पालनहार रूप में पुकारती है। विशेष रूप से यह मंत्र उन भक्तों के लिए लिखा गया जिनका जीवन दुःख, संकल्पशून्यता या पाप कर्मों से पीड़ित हो — जिसमें ईश्वर से दया और उद्धार की कामना की Read More

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परमेश्वर स्तुतिसार स्तोत्रम् (Parmeshwar Stutisaar Stotra)

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“परमेश्वर स्तुतिसार स्तोत्र” उच्चतम ईश्वर की महिमा का स्तुतिगान है, जिसमें शिव और विष्णु—दोनों का उल्लेख होता है, लेकिन यह एक ऐसे परमेश्वर को समर्पित है जो किसी रूप या विशेषता से परे है। यह गीतात्मक रचना आमतौर पर स्तोत्र रत्नावली से ली गई है और अन्य स्तोत्र या कीर्तन के अंत में, या शुभ Read More

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न्यासदशकम् (Nyasa Dasakam)

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न्यसा दशकम् स्वामि वी.एन. वेदांत देसिकन द्वारा रचित एक छोटा लेकिन गहन स्तोत्र है, जिसमें उन्होंने न्यासम या प्राप्तिस्थति (भगवान श्रीहरि के चरणों में आत्मसमर्पण) का सार 10 श्लोकों में संक्षेप रूप में प्रस्तुत किया है ।यह प्रपत्तिधर्म की पांच अंगुलीय विधि, सात्विक त्याग, संसारांतर्गत सेवा की कामना और जीवन के अंत में मोक्ष की Read More