परा पूजा स्तोत्र कथिततः श्री शंकराचार्य द्वारा रचित है और इसे “निर्गुण मानस पूजा” या “ब्रह्म-वित्तमय पूजा” कहा जाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे हम परमात्मा की पूजा को बाह्य सामग्री से परे, दृष्टिबोध और कर्मभेद से मुक्त होकर करें — जहाँ हमारा मन, प्राणी और शरीर ईश्वर की पूजा का माध्यम बन Read More
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“परमेश्वर स्तोत्र” एक आराधनात्मक स्तुति है, जिसमें “जगदीश, सुधीश, भवेश…” आरंभिक मंत्र है। यह ईश्वर को सर्वोच्च, पवित्र और पालनहार रूप में पुकारती है। विशेष रूप से यह मंत्र उन भक्तों के लिए लिखा गया जिनका जीवन दुःख, संकल्पशून्यता या पाप कर्मों से पीड़ित हो — जिसमें ईश्वर से दया और उद्धार की कामना की Read More
“परमेश्वर स्तुतिसार स्तोत्र” उच्चतम ईश्वर की महिमा का स्तुतिगान है, जिसमें शिव और विष्णु—दोनों का उल्लेख होता है, लेकिन यह एक ऐसे परमेश्वर को समर्पित है जो किसी रूप या विशेषता से परे है। यह गीतात्मक रचना आमतौर पर स्तोत्र रत्नावली से ली गई है और अन्य स्तोत्र या कीर्तन के अंत में, या शुभ Read More
न्यासदशकम् (Nyasa Dasakam)
न्यसा दशकम् स्वामि वी.एन. वेदांत देसिकन द्वारा रचित एक छोटा लेकिन गहन स्तोत्र है, जिसमें उन्होंने न्यासम या प्राप्तिस्थति (भगवान श्रीहरि के चरणों में आत्मसमर्पण) का सार 10 श्लोकों में संक्षेप रूप में प्रस्तुत किया है ।यह प्रपत्तिधर्म की पांच अंगुलीय विधि, सात्विक त्याग, संसारांतर्गत सेवा की कामना और जीवन के अंत में मोक्ष की Read More
“श्री नृसिंहगिरि अष्टोत्तर-शतनाम स्तोत्रम्” एक दिव्य स्तुति है जो आचार्य, गुरु और वेदांत के महान प्रचारक श्री नृसिंहगिरि महाराज के 108 गुणों (अष्टोत्तर-शतनाम) का महिमा गायन करती है। यह स्तोत्र उनके ब्रह्मस्वरूप, तपस्विता, ज्ञान, आचरण, त्याग, धार्मिकता, सेवा, विनम्रता और विश्वशांति में योगदान का भावपूर्ण चित्रण है। इस स्तोत्र में उन्हें ब्रह्मज्ञानी, शिवभक्त, नारायण परायण, Read More
नृसिंह स्तोत्र (Narsingh Stotra)
नृसिंह स्तोत्र भगवान विष्णु के चौथे अवतार—नृसिंह (नर-सिंह)—का स्तुतिगान है, जिसमें उनके उग्र, रक्षक और दिव्य रूप का वर्णन अत्यंत प्रभावपूर्ण भाषा में किया गया है। नारसिंह अवतार Hiranyakashipu राक्षस का संहार कर धर्म की पुन: स्थापना हेतु प्रकट हुए थे, और यही कथा उनकी वीरता, क्रोध और भक्त-रक्षा के प्रतीक रूप प्रस्तुत करती है Read More
नीलसरस्वती स्तोत्र एक शक्तिशाली तांत्रिक स्तोत्र है, जो मां नीलसरस्वती को समर्पित है। नीलसरस्वती देवी, माँ तारा का ही एक उग्र रूप हैं, जिन्हें विशेष रूप से शत्रु नाश, ज्ञान की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि (वाणी की शक्ति), विद्या, तंत्र सिद्धि और आत्मबल को जागृत करने के लिए पूजा जाता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से तंत्र Read More
नाग स्तोत्रं (Naag Stotram)
श्री नाग स्तोत्र, जिसे अक्सर नव नाग स्तोत्र कहा जाता है, नाग देवताओं की आराधना हेतु रचा गया है। यह स्तोत्र गुरुओं जैसे अगस्त्य, पुलस्त्य, वैशम्पायन, सुमंतु और जैमिनि द्वारा प्रख्यात किया गया था, और इसमें आठ प्रमुख नाग—अनंत, वासुकी, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट, शंख—का स्मरण होता है श्री नाग स्तोत्र (Naag Stotra) अगस्त्यश्च Read More
धूमावती स्तोत्र (Dhumavati Stotra)
धूमावती देवी दस महाविद्याओं में सातवीं रूप हैं। उनका स्वरूप वृद्ध, धूम्र वर्ण, और कंकाल समान होता है, जो संसार की अस्थायिता और माया का प्रतीक है । उनके उपासक उनकी सकरात्मक ऊर्जा प्राप्त करते हुए अपनी आध्यात्मिक उन्नति, भय, संकट और छाया प्रभावों से मुक्ति पाते हैं। धूमावती अष्टक स्तोत्र (Dhumavati Ashtak Stotra) ॐ Read More
धनदा स्तोत्र (Dhanda Stotra)
धनदा लक्ष्मी स्तोत्र धन-संपत्ति की प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली एवं शुभ फलदायक स्तोत्र माना जाता है। इसकी विधिपूर्वक साधना शिव मंदिर, केले के वृक्ष, बिल्व (बेल) वृक्ष या किसी देवी मंदिर में की जानी चाहिए। साधक यदि ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए प्रतिदिन 100 पाठ करता है तो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त Read More

