
“सर्प सूक्त स्तोत्र” एक प्राचीन वैदिक स्तुति है जो सम्पूर्ण सर्प जाति को समर्पित है। यह स्तोत्र विभिन्न लोकों — जैसे ब्रह्मलोक, इन्द्रलोक, सत्यलोक, मलय पर्वत, पृथ्वी, समुद्र, ग्राम, वन एवं रसातल आदि में निवास करने वाले सर्पों की वंदना करता है। इसमें विशेष रूप से शेषनाग, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक और अनन्त जैसे दिव्य नागों Read More

