
भारतीय योग, तंत्र और आध्यात्मिक परंपरा में कुंडलिनी शक्ति को मानव शरीर में स्थित एक दिव्य और सुप्त ऊर्जा माना गया है। शास्त्रों के अनुसार यह शक्ति मेरुदंड (Spine) के आधार भाग में स्थित मूलाधार चक्र में सर्पाकार रूप से विराजमान रहती है। जब साधक नियमित साधना, ध्यान, प्राणायाम और मंत्र-जप के माध्यम से इस Read More










