शत्रु विन्ध्यवासिनी स्तोत्र माता विन्ध्यवासिनी को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जो विशेष रूप से शत्रुनाश, रक्षा और वशीकरण के उद्देश्यों से पाठ किया जाता है। माता विन्ध्यवासिनी, देवी दुर्गा का एक उग्र और रक्षक रूप हैं, जिनकी उपासना विशेष रूप से विन्ध्याचल पर्वत के क्षेत्र में की जाती है। स्कन्द पुराण, देवी भागवत, Read More
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वेदसारशिवस्तव (Vedsar Shiv Stava)
‘श्री वेदसार शिव स्तव’ भगवान शिव की महिमा और स्वरूप का सुंदर एवं सारगर्भित स्तुति ग्रंथ है। ऐसा माना जाता है कि इसका रचना कार्य आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा भगवान शिव की कृपा प्राप्ति हेतु किया गया था। यह स्तव शिव को समस्त सृष्टि का मूल और अंत मानते हुए उनकी दिव्य, योगी, रौद्र एवं Read More
“श्री वेङ्कटेश्वर शतनामावली स्तोत्रम्” भगवान विष्णु के दक्षिण भारत में पूजे जाने वाले रूप श्री वेङ्कटेश्वर (बालाजी, श्रीनिवास, गोविंद) की स्तुति में रचा गया एक अत्यंत पवित्र और फलदायक स्तोत्र है। इसमें भगवान वेङ्कटेश्वर के 108 दिव्य नामों का उल्लेख किया गया है, जो उनके विभिन्न गुणों, स्वरूपों और लीलाओं का गुणगान करते हैं। यह Read More
“श्री वीरविंशतिकाव्यं श्रीहनुमत्स्तोत्रम्” एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें भगवान श्री हनुमानजी के पराक्रम, भक्तिभाव, और दिव्यता का सुंदर काव्यमय वर्णन किया गया है। “वीरविंशति” शब्द का अर्थ है – बीस (20) वीरता से भरपूर श्लोक, जो श्रीहनुमान की महानता का गान करते हैं। इस स्तोत्र में कुल 21 श्लोक हैं, जिनमें अंतिम श्लोक स्तोत्र Read More
“नागपत्नीकृत श्रीकृष्ण स्तोत्र” विष्णुपुराण में वर्णित एक अत्यंत करुणामय और प्रभावशाली स्तुति है, जिसे कालिय नाग की पत्नियों (नागपत्नियों) ने श्रीकृष्ण की करुणा और क्षमा प्राप्त करने के लिए गाया था। यह स्तोत्र उस प्रसंग से संबंधित है जब श्रीकृष्ण ने यमुनाजल में रह रहे विषैले कालिय नाग को पराजित कर उसे अपने चरणों से Read More
“श्री विविध देव स्तोत्राणि” देवी-देवताओं के विभिन्न स्तोत्रों का एक दिव्य और प्रभावशाली संग्रह है, जो सनातन परंपरा में श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत है। इस संग्रह में प्रमुख रूप से भगवान गणेश, भगवती पार्वती, भगवान विष्णु, भगवान शिव, और अन्य देवताओं की स्तुतियाँ संकलित हैं, जिन्हें शास्त्रों और पुराणों में अत्यंत पुण्यदायक माना गया Read More
“श्री विश्वावसु गंधर्व कवच स्तोत्र” एक अत्यंत शक्तिशाली और दुर्लभ तांत्रिक स्तोत्र है, जिसका मूल उद्देश्य है – विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करना, स्त्री वशीकरण की सिद्धि प्राप्त करना, भग-भाग्य (विवाह सौभाग्य), ऐश्वर्य, संतान, प्रेम एवं वैवाहिक सुख की प्राप्ति। यह कवच स्वयं भगवान शिव द्वारा पार्वती जी को उपदेश रूप में Read More
यह स्तोत्र उन ब्राह्मण पत्नियों द्वारा रचा गया है, जिन्होंने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से प्रभावित होकर उनकी भक्ति में समर्पित जीवन जीया। यह स्तुति दर्शाती है कि किस प्रकार एक भक्त – चाहे वह किसी भी जाति, लिंग या अवस्था का हो – यदि श्रद्धा और भक्ति से भगवान की शरण में आता है, Read More
माँ विपरीत प्रत्यंगिरा देवी भद्रकाली या महाकाली का अत्यंत उग्र, शक्तिशाली और रहस्यमयी स्वरूप मानी जाती हैं। यह स्तोत्र उनके अत्यंत प्रभावशाली रूप की स्तुति है, जो अदृश्य शत्रुओं, काले जादू, तांत्रिक क्रियाओं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है। जब कोई व्यक्ति दिखावे में मित्रता निभाता है, लेकिन भीतर से ईर्ष्या, द्वेष और Read More
विपरीत प्रत्यंगिरा महाविद्या स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमयी स्तोत्र है, जो देवी प्रत्यंगिरा को समर्पित है। यह स्तोत्र मुख्यतः उन साधकों के लिए रचा गया है जो तंत्र बाधा, काला जादू, भूत-प्रेत, शत्रु बाधा, अदृश्य आक्रमण या मानसिक-आध्यात्मिक संकटों से घिरे होते हैं। यह स्तोत्र देवी प्रत्यंगिरा की विपरीत शक्ति रूप का आह्वान करता Read More

