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पित्र देव स्तोत्रं (Pitra Dev Stotram)

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पितृ देव स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से युक्त स्तोत्र है, जो हमारे पूर्वजों (पितरों) की स्तुति, सम्मान और तृप्ति के लिए विशेष रूप से गाया या पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र मार्कण्डेय पुराण से लिया गया है, जिसमें रुचि मुनि द्वारा ध्यान और तप के माध्यम से पितरों को प्रसन्न करने के लिए Read More

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पितृ दोष स्तोत्र (Pitra Stotra)

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“पितृ स्तोत्र” एक अत्यंत पवित्र और प्रभावशाली स्तोत्र है, जो पितरों की स्तुति, स्मरण और तृप्ति के लिए रचा गया है। यह स्तोत्र उन दिव्य आत्माओं के सम्मान में गाया जाता है जिन्होंने इस धरती पर जन्म लिया और फिर शरीर त्याग कर पितृलोक को प्राप्त हुए। श्राद्ध, तर्पण और पितृ पक्ष जैसे अवसरों पर Read More

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पशुपतास्त्रेय स्तोत्र (Pashuptastrey Stotra)

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शनि स्वयं फल नहीं देते, वे केवल कर्मों का फल देते हैं। यदि कुंडली में शनि प्रतिकूल है, तो शिव की उपासना विशेष रूप से लाभकारी होती है। यह स्तोत्र अग्नि पुराण के 322वें अध्याय से लिया गया है और अत्यंत प्रभावशाली व शीघ्र फलदायी माना गया है। यह प्रयोग शनि दोष, विवाह में देरी, Read More

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परा पूजा स्तोत्रम् (Para Puja Stotra)

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परा पूजा स्तोत्र कथिततः श्री शंकराचार्य द्वारा रचित है और इसे “निर्गुण मानस पूजा” या “ब्रह्म-वित्तमय पूजा” कहा जाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे हम परमात्मा की पूजा को बाह्य सामग्री से परे, दृष्टिबोध और कर्मभेद से मुक्त होकर करें — जहाँ हमारा मन, प्राणी और शरीर ईश्वर की पूजा का माध्यम बन Read More

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परमेश्वर स्तोत्रम् (Parmeshwar Stotra)

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“परमेश्वर स्तोत्र” एक आराधनात्मक स्तुति है, जिसमें “जगदीश, सुधीश, भवेश…” आरंभिक मंत्र है। यह ईश्वर को सर्वोच्च, पवित्र और पालनहार रूप में पुकारती है। विशेष रूप से यह मंत्र उन भक्तों के लिए लिखा गया जिनका जीवन दुःख, संकल्पशून्यता या पाप कर्मों से पीड़ित हो — जिसमें ईश्वर से दया और उद्धार की कामना की Read More

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परमेश्वर स्तुतिसार स्तोत्रम् (Parmeshwar Stutisaar Stotra)

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“परमेश्वर स्तुतिसार स्तोत्र” उच्चतम ईश्वर की महिमा का स्तुतिगान है, जिसमें शिव और विष्णु—दोनों का उल्लेख होता है, लेकिन यह एक ऐसे परमेश्वर को समर्पित है जो किसी रूप या विशेषता से परे है। यह गीतात्मक रचना आमतौर पर स्तोत्र रत्नावली से ली गई है और अन्य स्तोत्र या कीर्तन के अंत में, या शुभ Read More

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न्यासदशकम् (Nyasa Dasakam)

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न्यसा दशकम् स्वामि वी.एन. वेदांत देसिकन द्वारा रचित एक छोटा लेकिन गहन स्तोत्र है, जिसमें उन्होंने न्यासम या प्राप्तिस्थति (भगवान श्रीहरि के चरणों में आत्मसमर्पण) का सार 10 श्लोकों में संक्षेप रूप में प्रस्तुत किया है ।यह प्रपत्तिधर्म की पांच अंगुलीय विधि, सात्विक त्याग, संसारांतर्गत सेवा की कामना और जीवन के अंत में मोक्ष की Read More

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नृसिंहगिरि अष्टोत्तर-शतनाम स्तोत्रम् (Narsingh Giri Ashtottara-Shatanama Stotra)

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“श्री नृसिंहगिरि अष्टोत्तर-शतनाम स्तोत्रम्” एक दिव्य स्तुति है जो आचार्य, गुरु और वेदांत के महान प्रचारक श्री नृसिंहगिरि महाराज के 108 गुणों (अष्टोत्तर-शतनाम) का महिमा गायन करती है। यह स्तोत्र उनके ब्रह्मस्वरूप, तपस्विता, ज्ञान, आचरण, त्याग, धार्मिकता, सेवा, विनम्रता और विश्वशांति में योगदान का भावपूर्ण चित्रण है। इस स्तोत्र में उन्हें ब्रह्मज्ञानी, शिवभक्त, नारायण परायण, Read More

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नृसिंह स्तोत्र (Narsingh Stotra)

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नृसिंह स्तोत्र भगवान विष्णु के चौथे अवतार—नृसिंह (नर-सिंह)—का स्तुतिगान है, जिसमें उनके उग्र, रक्षक और दिव्य रूप का वर्णन अत्यंत प्रभावपूर्ण भाषा में किया गया है। नारसिंह अवतार Hiranyakashipu राक्षस का संहार कर धर्म की पुन: स्थापना हेतु प्रकट हुए थे, और यही कथा उनकी वीरता, क्रोध और भक्त-रक्षा के प्रतीक रूप प्रस्तुत करती है Read More

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नील सरस्वती देव्या स्तोत्र (Neelsaraswati Devya Stotra)

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नीलसरस्वती स्तोत्र एक शक्तिशाली तांत्रिक स्तोत्र है, जो मां नीलसरस्वती को समर्पित है। नीलसरस्वती देवी, माँ तारा का ही एक उग्र रूप हैं, जिन्हें विशेष रूप से शत्रु नाश, ज्ञान की प्राप्ति, वाक्-सिद्धि (वाणी की शक्ति), विद्या, तंत्र सिद्धि और आत्मबल को जागृत करने के लिए पूजा जाता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से तंत्र Read More