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मातंगी हृदय स्तोत्र (Matangi Hridaya Stotra)

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मातंगी हृदय स्तोत्र तंत्र परंपरा में अष्टमहाविद्याओं में एक प्रमुख देवी श्री मातंगी को समर्पित एक अत्यंत रहस्यमय, शक्तिशाली और कल्याणकारी स्तोत्र है। यह स्तोत्र स्वयं भगवान भैरव द्वारा देवी भैरवी को उपदेश रूप में प्रदान किया गया है, जिसमें उन्होंने मातंगी देवी के हृदयस्थ रूप की स्तुति का रहस्य उजागर किया है। मातंगी देवी Read More

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मातंगी स्तोत्र (Matangi Stotra)

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मातंगी स्तोत्र देवी मातंगी की स्तुति में रचा गया एक तांत्रिक एवं रहस्यात्मक स्तोत्र है। मातंगी दस महाविद्याओं में नवम स्थान पर विराजमान हैं और उन्हें शब्द शक्ति तथा वाणी की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। यह स्तोत्र देवी के अघोर, सौंदर्य, विद्या, तंत्र और सिद्धि स्वरूपों का वर्णन करता है। देवी मातंगी को त्रिलोक Read More

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मत्स्य स्तोत्र (Matsya Stotram)

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मत्स्य स्तोत्रम् भगवान विष्णु के प्रथम अवतार — मत्स्य रूप की स्तुति में रचा गया एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। जब सृष्टि के प्रारंभ में महाप्रलय आया और वेद लुप्त हो गए, तब भगवान ने मछली (मत्स्य) का रूप धारण कर वेदों की रक्षा की और राजा सत्यव्रत (जो आगे चलकर वैवस्वत मनु बने) को Read More

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मंगल चण्डिका स्तोत्र (Mangal Chandika Stotra)

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‘चण्डी’ शब्द का अर्थ होता है — जो चतुर, दक्ष और रक्षण में निपुण हो। वहीं ‘मंगल’ शब्द शुभता और कल्याण का प्रतीक है। अतः जो देवी कल्याण में दक्ष हैं, विपत्तियों का नाश करती हैं, हर्ष और मंगल प्रदान करती हैं — उन्हें मंगल चण्डिका कहा जाता है। ‘चण्डिका’ शब्द देवी दुर्गा का भी Read More

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मंगला गौरी स्तोत्रं (Mangla Gauri Stotram)

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मंगला गौरी स्तोत्र देवी पार्वती जी के मंगलमयी स्वरूप — मंगला गौरी — को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और मंगलकारी स्तोत्र है। यह स्तोत्र विशेष रूप से स्त्रियों के सौभाग्य, सुन्दर दांपत्य जीवन, शीघ्र विवाह, और संतान सुख के लिए फलदायक माना जाता है। मंगलवार के दिन देवी मंगला गौरी की उपासना का विशेष महत्व Read More

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मंगल ग्रह स्तोत्रम् (Mangal Stotra)

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मंगल स्तोत्र वैदिक परंपरा में एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है जो मंगल ग्रह (भौम) को समर्पित है। वैदिक ज्योतिष में मंगल को शक्ति, पराक्रम, भूमि, साहस, ऊर्जा, रक्त और भाई से संबंधित ग्रह माना गया है। मंगल देवता को “भूमिपुत्र” कहा जाता है क्योंकि वे पृथ्वी माता के पुत्र हैं। यह स्तोत्र उन सभी लोगों Read More

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मंगल गीतम (Mangal Gitam)

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“श्री मंगल गीतम” एक अत्यंत मधुर एवं भावपूर्ण भक्ति रचना है, जिसकी रचना महाकवि जयदेव ने की थी। यह स्तुति भगवान विष्णु के विविध अवतारों—विशेषतः श्रीकृष्ण और श्रीराम—की लीलाओं, सौंदर्य, करुणा और मंगलदायक स्वरूप का सुंदर वर्णन करती है। इस गीत में भगवान के विभिन्न रूपों की स्तुति करते हुए, भक्त उनके चरणों में पूर्ण Read More

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भारत भूमात्र स्तोत्र (Bharat Bhumatra Stotra)

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“भारत भूमातृ स्तोत्र” भारत माता की महिमा और दिव्यता का भावपूर्ण स्तुति-पाठ है। यह स्तोत्र मातृभूमि भारत को देवी के रूप में पूजते हुए उसके प्राकृतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक वैभव की सुंदर स्तुति करता है। इसमें भारतवर्ष को देवी पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती, अन्नपूर्णा और शिवा के स्वरूप में प्रतिष्ठित किया गया है। हिमालय को Read More

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भवानी भुजंगप्रयात स्तोत्रम् (Bhawani Bhujangpryat Stotra)

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“भवानी भुजंगप्रयात स्तोत्र” एक अत्यंत दिव्य और प्रभावशाली स्तोत्र है जो देवी भवानी (पराशक्ति, त्रिपुरासुंदरी, आदि शक्ति) की महिमा का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भुजंगप्रयात छंद में रचित है, जिसमें श्लोकों की लय साँप के चलने की भांति बहती है – इसीलिए इसे “भुजंगप्रयात” कहा जाता है। इस स्तोत्र में देवी भवानी के दिव्य Read More

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भवतु स्तोत्र (Bhavtu Stotra)

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भवतु स्तोत्र (ॐ सह नाववतु…) एक अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध वैदिक शांति मंत्र है, जो विशेष रूप से गुरु और शिष्य द्वारा एक साथ अध्ययन प्रारंभ करने से पहले पढ़ा जाता है। यह यजुर्वेद और तैत्तिरीय उपनिषद में पाया जाता है। भवतु स्तोत्र (Bhavatu Stotra) ॐ सः नववतुॐ सह नववतुॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॐ सह Read More