श्री हनुमान की पूजा और आराधना में संकट मोचन हनुमान अष्टक का नियमित पाठ भक्तों के जीवन से समस्त संकटों को समाप्त करने में अत्यंत प्रभावशाली होता है। यह स्तोत्र उन कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विशेष रूप से कल्याणकारी है, जब कोई व्यक्ति मानसिक, शारीरिक या आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा हो। हनुमान जी Read More
जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणाकर करतार हरे,जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशी सुख-सार हरे,जय शशि-शेखर, जय डमरू-धर, जय जय प्रेमागार हरे,जय त्रिपुरारी, जय मदहारी, अमित अनन्त अपार हरे,निर्गुण जय जय सगुण अनामय, निराकार, साकार हरे ,पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ १ ॥ जय रामेश्वर, जय नागेश्वर, वैद्यनाथ, केदार हरे,मल्लिकार्जुन, सोमनाथ जय, Read More
गंगा अष्टोत्तर-शतनामस्तोत्रम् (गंगा माँ के 108 नामों की स्तुति) एक अत्यंत पुण्यदायक स्तोत्र है, जिसमें माँ गंगा के विभिन्न दिव्य नामों का संकलन है। यह स्तोत्र भक्तों द्वारा गंगा माँ की महिमा गाने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। गंगा अष्टोत्तर-शतनामस्तोत्र – नामावली: ॐ गंगायै नमः ।ॐ विष्णुपादसंभूतायै नमः ।ॐ हरवल्लभायै Read More
यह “श्री माँ गंगा स्तोत्रम्” आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक सुंदर और भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जो माँ गंगा की महिमा का गुणगान करता है। इसमें गंगा की शुद्धता, उनके पावन जल की महिमा और उनकी कृपा से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभों का वर्णन किया गया है। स्तुति में बताया गया है कि माँ गंगा का Read More
यह स्तुति महाभारत के भीष्म पर्व में पाई जाती है, जब भीष्म पितामह शरशय्या पर लेटे हुए थे और भगवान श्री कृष्ण के समक्ष अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट कर रहे थे। यह स्तुति भगवान श्री कृष्ण के अद्वितीय गुणों और उनके दिव्य स्वरूप की गहरी प्रशंसा करती है। इस स्तुति में भीष्म पितामह ने Read More
यह श्लोक भगवान श्री कृष्ण की अद्वितीय महिमा और रूप की विस्तृत स्तुति है। इसे “श्री कृष्ण चन्द्र कृपालु भज मन” के रूप में जाना जाता है। यह श्लोक भगवान श्री कृष्ण के शारीरिक रूप, उनके गुण, और उनकी लीलाओं का सुंदर वर्णन करता है। यह श्लोक विशेष रूप से उनके रूप, गहनों, मुद्रा और Read More
शिव स्तुति भगवान शिव की महिमा का वर्णन और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है। यह स्तुति न केवल भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि जीवन के विभिन्न कठिनाइयों और संकटों से भी मुक्ति दिलाती है। शिव स्तुति के संदर्भ में कुछ विशेष बातें निम्नलिखित हैं: श्री कुबेर Read More
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥ यदा यदा हि धर्मस्य श्लोक (Yada Yada hi Dharmasya Sloka) यह मंत्र भगवान कुबेर और माता अष्ट-लक्ष्मी को समर्पित है। कुबेर धन के देवता हैं और अष्ट-लक्ष्मी समृद्धि और सौभाग्य की प्रतीक हैं। इस मंत्र का नियमित जाप जीवन में आर्थिक समृद्धि, Read More
“यदा यदा हि धर्मस्य” श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के चतुर्थ अध्याय (ज्ञान योग) का सातवां और आठवां श्लोक है। अध्याय का नाम: गणपति अथर्वशीर्षम (Ganapathy Atharvaseersham) तुलसी जी की आरती (Tulsi ji ki aarti) श्लोक का संदर्भ: भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि जब-जब संसार में धर्म का ह्रास होता है और अधर्म का विस्तार होता है, Read More
ॐ नमो हनुमते भय भंजनाय मंत्र हनुमानजी को समर्पित है। यह मंत्र भय को दूर करने, साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने तथा नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा के लिए जपा जाता है। ॐ अघोरेभ्यो अथ घोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्वशर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररूपेभ्यः।। 1. मुख्य हनुमान मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः (Om Hreem Shreem Lakshmi Bhyo Namaha) ॐ Read More

