
यह दिव्य श्लोक भगवान भगवान शिव की महान स्तुति रुद्राष्टकम का छठा भाग है, जिसकी रचना भक्त कवि गोस्वामी तुलसीदास ने की थी। यह स्तोत्र शिवजी के अनंत, निराकार और कल्याणकारी स्वरूप का अत्यंत सुंदर वर्णन करता है। इस विशेष श्लोक में भगवान शिव को काल से परे, सृष्टि के संहारक, भक्तों को आनंद देने Read More









