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श्री देवी खड्गमाला स्तोत्रम् (Devi Khadgamala Stotram)

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“श्री शुद्ध शक्ति माला महा मन्त्र” जिसे देवी खड्गमाला स्तोत्र भी कहा जाता है, श्रीविद्या साधना का अत्यंत गूढ़ और दिव्य स्तोत्र है। यह श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी के नवावरण — अर्थात् श्रीचक्र के नौ मंडलों — में स्थित देवी शक्तियों की स्तुति है। प्रत्येक शक्ति दिव्य सामर्थ्य, ज्ञान और सिद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती है। Read More

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श्री चामुण्डेश्वरी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रं (Shri Chamundeshwari Ashtottara Shatanama Stotram)

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“श्री चामुण्डेश्वरी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्” देवी चामुण्डा के 108 दिव्य नामों का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है।यह स्तोत्र देवी चामुण्डेश्वरी (महाकाली का उग्र रूप) को समर्पित है, जो महिषासुर, शुंभ, निशुंभ, मधु–कैटभ जैसे असुरों का संहार करने वाली शक्ति हैं।इनके नामों में देवी के सभी रूपों का वर्णन है —महाकाली, महालक्ष्मी, महावाणी, दुर्गा, पार्वती, अन्नपूर्णा, भैरवी, ललिता Read More

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चण्डी स्तोत्र Chandi Stotram

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चण्डी स्तोत्र देवी महामाया चण्डिका को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली एवं दुर्लभ तांत्रिक स्तोत्र है।इसमें देवी दुर्गा, काली, गौरी, त्रिपुरासुंदरी, बगलामुखी, भैरवी, नीलसुंदरी आदि शक्ति के विविध स्वरूपों की स्तुति की गई है।यह स्तोत्र साधक को यह सिखाता है कि देवी के प्रसाद से वह सब प्राप्त किया जा सकता है जो संसार में दुर्लभ Read More

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चन्द्रशेखर अष्टक स्तोत्र (Chandrashekhara Ashtakam)

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“चन्द्रशेखराष्टकम्” एक अत्यंत प्रभावशाली और प्रसिद्ध शिव स्तोत्र है, जिसकी रचना मार्कण्डेय ऋषि ने की थी।यह स्तोत्र भगवान चन्द्रशेखर शिव (जिनके जटाओं में चन्द्र विराजमान हैं) की स्तुति में रचा गया है। कथा के अनुसार —जब बालक मार्कण्डेय को अपने अल्पायु (१६ वर्ष) का ज्ञान हुआ और मृत्यु समीप आई, तब उसने महायोगी भाव से Read More

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आद्यास्तोत्रम् (Adya Stotram)

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“आद्या स्तोत्र” एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली देवी स्तोत्र है, जो ब्रह्मयामल तंत्र में वर्णित है। यह स्तोत्र स्वयं भगवान ब्रह्मा और नारद जी के संवाद में प्रकट हुआ है। इसमें आद्या शक्ति (मूल आदिशक्ति, जिसे दुर्गा, महाकाली, पार्वती या विष्णुवल्लभा भी कहा गया है) की महिमा का वर्णन किया गया है।आद्या देवी को समस्त Read More

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श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम् (Dakshinamurthy Stotram)

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“श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम्” आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अद्भुत दार्शनिक और आध्यात्मिक स्तोत्र है।यह स्तोत्र भगवान शिव के दक्षिणामूर्ति रूप की स्तुति में समर्पित है — जो मौन रूप से ज्ञान का उपदेश देने वाले गुरु हैं। भगवान दक्षिणामूर्ति “गुरुतत्त्व” के मूर्त स्वरूप हैं। वे वटवृक्ष (बड़ के पेड़) के नीचे दक्षिण दिशा की ओर Read More

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न्यासा दशकम् (Sri Nyaasa Dashakam)

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“न्यासा दशकम्” एक अत्यंत पवित्र वैष्णव स्तोत्र है, जिसे श्रीवैष्णव परंपरा में पूर्ण आत्मसमर्पण (शरणागति) के रूप में माना गया है। “न्यास” शब्द का अर्थ है — समर्पण या आत्मनिवेदन।यह स्तोत्र भगवान श्रीविष्णु (श्रीपति) के चरणों में अपनी आत्मा, शरीर और कर्मों को समर्पित करने का भाव व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने मन, वचन Read More

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संतिकरं स्तोत्र (Santikaram Stotra)

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संतिकरं स्तोत्र जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना पूज्य मुनिसुंदर सूरीजी ने की थी। यह स्तोत्र मन को गहन शांति प्रदान करने वाला, और जीवन से समस्त कष्ट, दुख तथा नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने वाला माना जाता है। इस स्तोत्र में अनेक बीज मंत्रों और देवी-देवताओं के आह्वान Read More

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जिव्हा स्तोत्र (Jivha Stotra) – जिव्हा प्रार्थना (Jivha Prathna)

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“जिव्हा स्तोत्र” एक अत्यंत पवित्र और शिक्षाप्रद स्तोत्र है,जो हमारी वाणी (जिह्वा) की शुद्धता और सदुपयोग का संदेश देता है।जैसे मन के विचार हमारे कर्मों का आधार बनते हैं,वैसे ही जिह्वा से निकले शब्द हमारे जीवन का स्वरूप तय करते हैं। जिव्हा स्तोत्र (Jivha Stotra) – जिव्हा प्रार्थना (Jivha Prathna) मत्प्रिय सखी मत्जिव्हे मयप्नुकंपां कुरुष्व Read More

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श्री नवग्रह मंडलवासिनि लक्ष्मी स्तवन (Shri Navagraha Mandalvasini Lakshmi Stavan)

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श्री नवग्रह मंडलवासिनि लक्ष्मी स्तवन नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) में स्थित विभिन्न प्रकार की लक्ष्मी-देवियों की स्तुति है। प्रत्येक ग्रह की लक्ष्मी का स्वरूप, रंग, शक्ति और गुण अलग-अलग होते हैं। यह स्तवन उन सभी लक्ष्मियों का पूजन और ध्यान कर हमारी जीवन में संपत्ति, बुद्धि, सौभाग्य, स्वास्थ्य, Read More