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ऊँ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा (Om namah kamala Vasinyai swaha)

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यह मंत्र माता कमला (Lakshmi) का एक दशाक्षरी मंत्र है, जो दस अक्षरों से मिलकर बना है। यह मंत्र न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली है, बल्कि साधना और ध्यान की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ॐ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा॥ भावार्थ: यह मंत्र माता लक्ष्मी के कमला स्वरूप को समर्पित है। Read More

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अखंड विष्णु कार्यम् व्यासनेन चराचरम् – विष्णु मंत्र (Akhand Vishnu Karyam Vyaasnena Characharam)

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धन और समृद्धि की कामना हर व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण होती है। धन न केवल भौतिक सुख-सुविधाएँ प्रदान करता है, बल्कि यह आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान को भी बढ़ाता है। एक प्रसिद्ध संस्कृत कहावत है, “धन मूलम इदं जगत,” जिसका तात्पर्य है कि समस्त जगत धन पर निर्भर है। इस लेख में हम एक ऐसा Read More

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ॐ विष्णवे नम: (Om Vishnave Namah)

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ॐ विष्णवे नम: एक संक्षिप्त लेकिन अत्यंत प्रभावी मंत्र है जो भगवान विष्णु को समर्पित है ॐ विष्णवे नम: महत्व और प्रभाव (Significance and Impact): उपयोग:

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सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रच्छक काहू को डर ना (Sab sukh lahe tumhaari sharna, tum rakshak kaahu ko dar naa)

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“सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रच्छक काहू को डर ना” हनुमान चालीसा की 27वीं चौपाई है। इसमें बहुत ही सुंदर भाव छिपा है। आइए इसका विस्तार से अर्थ, भाव और महत्व समझते हैं: एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते? जानिए इस रहस्य से भरी परंपरा के पीछे की अनसुनी बातें! सब सुख लहै तुम्हारी Read More

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श्री कृष्णाष्टकम् – भजे व्रजैक मण्डनम् (Krishnashtakam – Bhaje Vrajaik Maṇḍanam)

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“श्री कृष्णाष्टकम् – भजे व्रजैक मण्डनम्” — यह भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति में रचित एक अत्यंत मधुर और रसपूर्ण अष्टक (आठ श्लोकों वाला स्तोत्र) है। इसे विशेष रूप से रागात्मिका भक्ति (प्रेम से पूर्ण भक्ति) के लिए जाना जाता है। कूर्म स्तोत्रम् (Kurma Stotram) “भजे व्रजैक मण्डनम्” से शुरू होने वाला यह श्रीकृष्णाष्टकम् भगवान श्रीकृष्ण Read More

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श्री कृष्णाष्टकम् – वसुदेव सुतं देवंकंस (Shri Krishnashtakam)

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“श्री कृष्णाष्टकम्” एक भक्ति-प्रधान स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, स्वरूप, सौंदर्य और महिमा का वर्णन करता है। “अष्टकम्” का अर्थ है “आठ पदों वाला” — इस स्तोत्र में श्रीकृष्ण के गुणों की आठ श्लोकों के माध्यम से स्तुति की गई है। यह स्तोत्र श्रद्धालु भक्तों द्वारा विशेष रूप से प्रातःकाल में पाठ Read More

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जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू’ हनुमान चालीसा चौपाई (Jug sahastra jojan par bhanu, lilyo tahi madhur fal janu)

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यह पंक्तियाँ गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा का हिस्सा हैं। हनुमान चालीसा एक 40 चौपाइयों वाला स्तोत्र है जो भगवान हनुमान जी की महिमा का गुणगान करता है। यह विशेष दोहा बाल हनुमान जी की असीम शक्ति, साहस और भक्ति को दर्शाता है। इसमें वर्णन है कि जब हनुमान जी छोटे थे, उन्होंने चमकते Read More

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संकट कटै मिटे सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा (Sankat Kate Mite Sab Peera )

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भारतीय भक्ति साहित्य में हनुमान चालीसा एक ऐसा दिव्य ग्रंथ है, जो केवल स्तुति नहीं, बल्कि एक जीवन रक्षा कवच है। इसमें प्रत्येक दोहा मन, तन और आत्मा को शक्तिशाली बनाने की क्षमता रखता है।इन पंक्तियों में न केवल हनुमान जी की अपार शक्ति का वर्णन है, बल्कि यह भी बताया गया है कि उनके Read More

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सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना (Sab Sukh lahe Tumhari Sarna..Tum Rakshak Kahu ko Darna)

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सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना”।यह दोहा श्री हनुमान चालीसा से लिया गया है, और इसका गहरा भावार्थ है। इन पंक्तियों में न केवल श्री हनुमान जी की महिमा का वर्णन है, बल्कि उनके प्रति पूर्ण समर्पण से मिलने वाले लाभों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसी ही एक अत्यंत Read More

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ॐ मृत्युंजयाय रुद्राय नीलकण्ठाय शम्भवे मंत्र – भगवान शिव का मानसिक और शारीरिक रोग निवारक मंत्र। (Om Mrityunjaya Rudraya Neelakanthaya Shambhave mantra)

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इस दिव्य मृत्युंजय मंत्र का जाप साधक के भीतर प्रचंड सात्विक ऊर्जा का संचार करता है, जो हर प्रकार के मानसिक और शारीरिक रोगों, विकारों और भय को दूर करता है। जब यह मंत्र अटल श्रद्धा और शिव भक्ति के साथ पढ़ा जाता है, तो यह नकारात्मक शक्तियों, गंभीर रोगों, मृत्यु भय, भूत-प्रेत, शत्रु बाधा Read More